
प्रदेश की एक महत्वपूर्ण जांच एजेंसी में पदस्थ डिप्टी सेक्रेटरी मैडम एक बार फिर चर्चा में हैं। पिछले वर्ष अगस्त में जारी तबादला सूची में उनका नाम शामिल किया गया था और उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपे जाने की घोषणा भी कर दी गई थी। सामान्यतः तबादला आदेश जारी होने के कुछ दिनों के भीतर अधिकारी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर लेते हैं, लेकिन इस मामले में करीब दस महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। यही वजह है कि प्रशासनिक हलकों में इस विषय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
सूत्रों के अनुसार तबादला सूची में शामिल कई अधिकारियों ने अपने नए पदों पर कार्यभार संभाल लिया था, लेकिन डिप्टी सेक्रेटरी मैडम अब भी अपने पुराने विभाग में कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित एजेंसी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है और कई संवेदनशील मामलों की निगरानी भी उनके पास रही है। ऐसे में उनके तबादले के आदेश पर अमल नहीं होने को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि मैडम को अपने वर्तमान कार्यस्थल से विशेष लगाव है और इसी कारण वे लंबे समय से वहीं बनी हुई हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक आवश्यकता बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रभाव और पहुंच से जोड़कर देख रहे हैं। यही कारण है कि मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन द्वारा तबादला आदेश जारी किया जा चुका है तो उस पर अमल कब होगा। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि नई तबादला सूची जारी होती है या संबंधित अधिकारी नई जिम्मेदारी संभालती हैं, तो इस लंबे समय से चल रही चर्चा पर विराम लग सकता है। फिलहाल मंत्रालय और विभागीय गलियारों में डिप्टी सेक्रेटरी मैडम का यह लंबित तबादला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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