
मध्य प्रदेश में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की संरचना को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान आंकड़ों और पदोन्नति की स्थिति को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले वर्षों में एडीजी (Additional Director General) स्तर के अधिकारियों की संख्या में तेज गिरावट आ सकती है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ना तय है।
वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक राज्य में एडीजी स्तर के आईएएस/आईपीएस अधिकारियों की संख्या लगभग 50 से 60 के बीच बनी हुई है। लेकिन आने वाले समय में यह संतुलन बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2027 तक यह संख्या घटकर केवल 16 रह सकती है, जो कि एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती होगी।
विशेष रूप से 2002 बैच के अधिकारी अभय सिंह उस समय एडीजी स्तर पर प्रमुख भूमिका में होंगे। इसके साथ ही डीआईजी स्तर के पदों पर भी भारी दबाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 50 डीआईजी कार्यरत हैं, जबकि 2012 बैच के 19 अधिकारी प्रमोशन की प्रतीक्षा में हैं और 2013 बैच के 6 अधिकारी भी लाइन में हैं।
अगर एक्स-कैडर पदों को शामिल कर लिया जाए, तो डीआईजी की संख्या बढ़कर लगभग 73 तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद पदों का संतुलन और प्रमोशन की गति एक बड़ा मुद्दा बना रहेगा।
आईजी स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल रहा है। 2007 बैच के अधिकारी पहले ही आईजी बन चुके हैं, जबकि 2008 बैच के केवल 3 अधिकारी ही इस पद तक पहुंच पाए हैं। वर्तमान में 4 पद खाली हैं, जिससे 2009 बैच के अधिकारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता खुल सकता है।
1 जनवरी 2027 को 23 अधिकारियों के प्रमोशन की संभावना जताई जा रही है। राज्य में आईजी के कुल 31 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इन पदों को भरने के लिए पर्याप्त वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं होंगे।
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