मध्य प्रदेश: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक वर्णवाल पर आरोपों की गूंज

ब्राणवानी डेस्क: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) अशोक वर्णवाल का नाम चर्चा में बना हुआ है। मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों से जुड़ा बताया जा रहा है।

ब्राणवाणी को मिली जानकारी के अनुसार, अशोक वर्णवाल पर आरोप है कि उन्होंने एनजीटी के निर्देशों के विपरीत जाकर राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा जारी कुछ विवादित एनओसी (NOC) को सही ठहराने का प्रयास किया है। यह कदम प्रदेश के ही एक अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को संभावित कानूनी कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है।

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इस मामले को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि क्या प्रभावशाली पदों पर बैठे अधिकारी एनजीटी जैसे संस्थान के आदेशों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं, और क्या प्रशासनिक स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन गंभीर माना जाता है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। यदि निर्धारित समय में जुर्माना नहीं भरा जाता, तो प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो ₹25,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।कानून के अनुसार एनजीटी के आदेशों को हाईकोर्ट के आदेश के समान प्रभाव माना जाता है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो इसे प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से गंभीर मामला माना जा सकता है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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