भोपाल में भ्रष्टाचार का भूकंप: सौ करोड़ रुपये की गड़बड़ी से हिली सत्ता की दीवारें

भोपाल: मध्य प्रदेश में सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच एक ऐसा भयंकर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। यह मामला ‘मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद’ के पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडे से जुड़ा है, जिन पर सौ करोड़ रुपये की गड़बड़ी का गंभीर आरोप है। दस्तावेज और प्रमाण मौजूद होने के बावजूद, जांच एजेंसियां और विभाग मानो सोते हुए भालू की तरह जड़ता में हैं।

सपक्ष पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पीयूष प्रताप सिंह ने पूरे प्रकरण की शिकायत EOW और लोकायुक्त में दर्ज कराई, लेकिन महीनों बाद भी फाइलें ठंडी राख की तरह जमी हुई हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जांच को जानबूझकर कछुआ चाल में रखा गया है ताकि मामला समय बीतते-बीतते ठंडे बस्ते में दब जाए।

इस पूरे खेल में विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रम की भूमिका भी रहस्य और संदेह से घिरी हुई है। प्रशासनिक निष्पक्षता के लिए जाने जाने वाले सेल्वेन्द्रम इस मामले में रहस्यमयी निष्क्रियता क्यों दिखा रहे हैं, यह सवाल सबके मन में उठता है। क्या यह संकेत है कि विभाग खुद भ्रष्टाचार को बचाने का खेल खेल रहा है? उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है कि क्या सरकारी रसूख की छाया में जांच एजेंसियां अपनी आंखें मूंद लेंगी।

ये भी पढ़े – क्या सत्ता का प्रभाव लोकतंत्र को कर रहा है कमजोर? कर्नाटक के राज्यपाल के पोते पर गंभीर आरोप

सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर डॉ. पांडे की सक्रियता चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि क्या वे अपने राजनीतिक दबदबे का इस्तेमाल जांच पर असर डालने के लिए कर रहे हैं। जनता पूछ रही है कि मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाना भ्रष्टाचार की धूल मिटा देगा क्या।

डॉ. पांडे पर केवल जन अभियान परिषद ही नहीं, बल्कि RTO में असंगत परमिट घोटाले के भी गंभीर आरोप हैं। यह साफ करता है कि अनियमितताओं का जाल गहरा और फैलावदार है।जांच की कछुआ चाल और सरकारी उदासीनता से क्षुब्ध शिकायतकर्ता पीयूष प्रताप सिंह अब हार नहीं मान रहे। उन्होंने CID, DGP और राष्ट्रपति तक पत्र लिखकर सख्त हस्तक्षेप की मांग की है।

ब्रांडवाणी समाचार हमेशा सच के साथ खड़ा रहा है। सवाल सीधे हैं: क्या सौ करोड़ का यह घोटाला भी फाइलों में दबकर मिट जाएगा? क्या मोहन सरकार अपने अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी? या यह जांच सिर्फ दिखावे की अफवाह बनकर रह जाएगी? शासन को समझना होगा कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना उसे और बढ़ावा देता है। जनता की कड़ी मेहनत की कमाई का सौ करोड़ रुपये का हिसाब अवश्य देना होगा।

ये भी पढ़े – मेडिकल कॉलेज में नियमों के बजाय प्रभाव की हुकूमत, डीन के फैसलों पर उठ रहे सवाल

  • bhopal-corruption-scandal-100-crore-discrepancy
  • Brandwaani Desk

    Brandwaani Desk

    10+ वर्षों का अनुभव। हर दिन, पल-पल की खबरों के साथ। निष्पक्ष व भरोसेमंद रिपोर्टिंग, हर खबर की गहराई तक पहुँचने का प्रयास। सच्ची पत्रकारिता, आपके भरोसे के साथ।

    Related Posts

    क्या सत्ता का प्रभाव लोकतंत्र को कर रहा है कमजोर? कर्नाटक के राज्यपाल के पोते पर गंभीर आरोप

    क्या सचमुच नियम आम जनता को दबाने के लिए बनाए गए हैं? क्या सत्ता का प्रभाव…

    आगे पढ़ें
    मेडिकल कॉलेज में नियमों के बजाय प्रभाव की हुकूमत, डीन के फैसलों पर उठ रहे सवाल

    ब्राणवाणी डेस्क: लोकतंत्र की मूल भावना यह कहती है कि कानून हर व्यक्ति के लिए समान…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    कटारे का विधानसभा में ज़ोरदार बयान: “सरकारी योजनाएँ युवाओं के लिए अफीम”

    कटारे का विधानसभा में ज़ोरदार बयान: “सरकारी योजनाएँ युवाओं के लिए अफीम”

    संजय पाठक पर 413 करोड़ का जुर्माना: राजनीति की साजिश या न्याय का प्रश्न?

    संजय पाठक पर 413 करोड़ का जुर्माना: राजनीति की साजिश या न्याय का प्रश्न?

    PHQ में हलचल: प्रतिनियुक्ति से लौटे साहब, मंत्रालय के गलियारों में ‘लॉबिंग’ तेज

    PHQ में हलचल: प्रतिनियुक्ति से लौटे साहब, मंत्रालय के गलियारों में ‘लॉबिंग’ तेज

    रील बनाम रियल, जब कलेक्टर साहब का ‘अपना बैग, अपना स्वैग’ बना चर्चा का विषय

    रील बनाम रियल, जब कलेक्टर साहब का ‘अपना बैग, अपना स्वैग’ बना चर्चा का विषय

    अपने ही मकड़जाल में फंसा पीएचक्यू, 500 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

    अपने ही मकड़जाल में फंसा पीएचक्यू, 500 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल