
ब्राणवाणी डेस्क फीचर: सत्ता के दफ्तरों में कब किस अधिकारी का भाग्य चमक जाए और कब कोई ऊँचाई से नीचे आ गिरे, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं होता। प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक अहम और अत्यंत संवेदनशील विभाग को लेकर चर्चाएं तेज हैं. अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनकी तबीयत बिगड़ने से किसी अन्य अधिकारी की किस्मत खुल गई।
विभाग के मूल ACS, जो अपनी कार्यशैली और कड़े स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं, अचानक स्वास्थ्य कारणों से लंबे अवकाश पर चले गए। उनकी गैरमौजूदगी में जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को दी गई, जिन्हें अब तक प्रशासनिक भाषा में ‘लूप लाइन’ यानी कम महत्व वाले पद पर माना जा रहा था। अगले साल सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे इस अधिकारी के लिए यह अवसर किसी सौभाग्य से कम नहीं माना जा रहा।
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पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर और हैरान करने वाला पहलू यही है, जिसकी चर्चा विभाग के अंदर तेजी से हो रही है। कार्यभार संभालते ही प्रभारी ACS ने उन सभी भुगतान संबंधी फाइलों को तेजी से निपटा दिया, जिन पर मूल ACS पहले गंभीर आपत्तियां दर्ज कर चुके थे। “जिन फाइलों पर लंबे समय से निर्णय लंबित था, उन पर हस्ताक्षर इतनी जल्दी हो जाएंगे, यह किसी ने सोचा भी नहीं था।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब यह जानकारी सामने आई कि मूल ACS अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं और उन्होंने अपना अवकाश आगे बढ़ा दिया है। ऐसे में प्रभारी अधिकारी के लिए यह अनुकूल समय और लंबा चलने की संभावना जताई जा रही है।प्रशासनिक गलियारों में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था है या फिर किसी सोची-समझी योजना के तहत लंबित फाइलों को मंजूरी दी जा रही है। ब्रांडवाणी समाचार इस पूरे प्रकरण पर अपनी नजर बनाए हुए है और आगे की स्थिति पर लगातार निगाह रखे हुए है।
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