
पाकिस्तान: पंजाब प्रांत में मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पशुओं पर लगाया गया कथित “गोबर टैक्स” चर्चा का विषय बन गया है। सरकार ने गाय और भैंस रखने वाले पशुपालकों पर प्रति पशु प्रतिदिन 30 पाकिस्तानी रुपये का शुल्क लागू किया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर रुख परिप्रेक्ष्य और मजाक देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह शुल्क पंजाब प्रांत की 168 चिन्हित कैटल कॉलोनियों में लागू किया गया है। इनमें लाहौर के हरबंसपुरा और गुज्जरपुरा जैसे इलाके भी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह टैक्स देय “सेवा शुल्क” है और इसे सुथरा पंजाब अभियान के तहत लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार पशुओं से निकलने वाले गोबर को इकट्ठा कर उससे बायोगैस और स्वच्छ ऊर्जा बनाने की योजना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
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हालांकि आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे पशुपालकों पर यह अतिरिक्त बोझ डाला जैसा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि अगर किसी व्यक्ति के पास 10 पशु हैं तो उसे करीब 11 हजार पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा का पेमेंट करना होगा।
पाकिस्तानी एक्ट्रेस और कॉमेडियन मिशी खान ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जब आम लोग महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं, तब इस तरह का टैक्स लगाना मजाकिया है। इंटरनेट पर कई व्यंग्यात्मक उद्धरण भी सामने आए, जिनमें कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि सरकार आगे बढ़ी “मानवीय बैंकों” पर भी टैक्स लगा सकती है, जबकि कुछ ने नेताओं के “गोबर भरे दिमाग” पर टैक्स लगाने की बात कही।
विपक्षी दलों और आलोचकों का आरोप है कि यह कदम पर्यावरण सुधार के नाम पर रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश है। उनका कहना है कि इससे छोटे डेयरी किसानों और पशुपालकों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
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