
जबेरा: जनपद पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों की निगरानी सवालों के घेरे में है। यहाँ एक ही अधिकारी के पास तीन महत्वपूर्ण प्रभार होने से व्यवस्था का संतुलन बिगड़ रहा है।पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से क्षेत्र में पदस्थ सहायक यंत्री शिवाजी गौंड न केवल सहायक यंत्री के रूप में काम कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के एसडीओ जबेरा और तेंदूखेड़ा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। इतनी व्यापक जिम्मेदारियां एक ही व्यक्ति पर होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
करीब 70 पंचायतों और कई निर्माण परियोजनाओं की मॉनिटरिंग एक ही अधिकारी द्वारा की जा रही है, जो व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े दायरे में कार्यों की प्रभावी निगरानी कैसे संभव है।क्षेत्र में कई मामले सामने आए हैं जहां कार्य अधूरे होने के बावजूद कागजों में उन्हें पूर्ण दर्शाकर सामग्री भुगतान की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है।
ग्राम सुरई में वर्ष 2022-23 में स्वीकृत अमृत सरोवर तालाब का निर्माण कार्य अब तक अधूरा है, जबकि सामग्री का अधिकांश भुगतान किया जा चुका है और केवल मजदूरी राशि शेष बताई जा रही है।हरदुआ खुर्द से जोगीखेड़ा मार्ग और सुरई से करोंदी मार्ग के सड़क निर्माण कार्य भी अधूरे बताए जा रहे हैं। जोगीखेड़ा मार्ग पर मटेरियल भुगतान होने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य अधूरा है और पुलिया भी क्षतिग्रस्त स्थिति में बताई जा रही है।
जनपद की कई पंचायतों में अधूरी नालियों को ‘कार्य पूर्ण’ दिखाकर पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप भी सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर नालियों का निर्माण अधूरा बताया जा रहा है।इन परिस्थितियों ने विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रवीण फुलपगारे ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी।
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