
बुरहानपुर: बुरहानपुर में शिक्षक पात्रता परीक्षा को पहले से काम कर रहे शिक्षकों के लिए अनिवार्य करने के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है।अध्यापक और शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में जिले के सभी शिक्षक और अध्यापक संगठन विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के खिलाफ है।
8 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजे पुराने तहसील कार्यालय से एक बड़ी वाहन रैली निकाली जाएगी। यह रैली शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी, जहां शिक्षक प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपेंगे और अपनी मांगों को मजबूती से रखेंगे।संयुक्त मोर्चा के अधिकारियों ने बताया कि इस रैली में जिले के सभी शिक्षक और अध्यापक संगठन के अधिकारी एक साथ नेतृत्व करेंगे। बड़ी संख्या में शिक्षक, अध्यापक और कर्मचारी इसमें शामिल होकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसे जिले के सबसे बड़े शिक्षक आंदोलनों में से एक माना जा रहा है।
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मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अचानक से शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना अन्यायपूर्ण है। इससे हजारों शिक्षकों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। इसी के खिलाफ यह आंदोलन किया जा रहा है, ताकि सरकार और प्रशासन तक उनकी बात स्पष्ट रूप से पहुंच सके।आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिले में व्यापक प्रचार किया जा रहा है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं और अधिक से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को रैली में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
इस आंदोलन के समर्थन में कई शिक्षक हैं – संतोष निंभोरे, जितेंद्र शर्मा, किशोर जाधव, विजेश राठौर, नंदकिशोर मोरे, प्रमोद सातव, अनिल सातव, अनिल बाविस्कर, डॉ. अशफाक खान, उखड्डू मोरे, भानुदास भंगाले, शैलेंद्र साठे, प्रमिला सगरे, नितिन पाटिल, गजानन बाविस्कर, बबीता श्रीवंश, ज्योति पाटील, तरुणा निंबालकर, प्रीति अग्रवाल, सारिका शाह, सरोज पाल, भगवत पवार, रमेश पवार, शिवलाल पाल, संतोष कुशवाह, स्वप्निल महाजन, विजय जयकर, पंकज महाजन, अतुल उईके, राधा अकोले, केतन तारे, भागवत महाजन, राजाराम शाह, शालिक चौधरी, दीपक डोल, विजय महाजन, मुरली पाटिल, प्रकाश पाटिल, पूनमचंद महाजन, कल्पना पवार, सुजीत ठाकुर और कई अन्य।
संयुक्त मोर्चा ने जिले के सभी शिक्षक और अध्यापक साथियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में रैली में शामिल होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएं।
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