
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ महिला सशक्तिकरण की एक नई और प्रेरणादायक मिसाल पेश की जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश का गृह विभाग स्त्री शक्ति के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह न केवल विभाग के लिए गौरव की बात है, बल्कि समाज में महिलाओं की प्रशासनिक दक्षता पर बढ़ते भरोसे का भी प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शासनकाल में शासन की कार्यप्रणाली में एक स्पष्ट बदलाव महसूस किया जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान अब महिलाओं को केवल सहभागी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें प्रमुख और निर्णायक पदों पर आसीन कर ‘लीडर’ के रूप में स्थापित करना है। इसी नीति के तहत प्रदेश के गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे में महिला अफसरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
वर्तमान प्रशासनिक ढांचे की बात करें तो गृह विभाग में इस समय तीन महिला अधिकारी सचिव के पद पर तैनात हैं। इन तीनों अनुभवी अधिकारियों के कंधों पर विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का भार है। खास बात यह है कि इन तीन पदों पर आसीन अधिकारियों में से 2 आईएएस (IAS) और 1 आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं, जो अपनी विशेषज्ञता से प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों को गति दे रही हैं।
डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में महिला अफसरों को जिस तरह से अधिकाधिक महत्व दिया जा रहा है, वह भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। महत्वपूर्ण विभागों में महिलाओं की यह सशक्त भागीदारी न केवल सरकारी कामकाज में संवेदनशीलता और पारदर्शिता लाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी की युवतियों के लिए सिविल सेवा में आने के नए द्वार भी खोलती है।
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