
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में इस समय हलचल तेज है। वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन आगामी अगस्त महीने के बाद सेवानिवृत्त (रिटायर) होने जा रहे हैं। उनके कार्यकाल के समाप्त होने की आहट के साथ ही प्रदेश के अगले प्रशासनिक मुखिया को लेकर सचिवालय से लेकर राजनीतिक हलकों तक में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि चयन की अंतिम मुहर कहाँ लगेगी? चर्चा है कि क्या अगले मुख्य सचिव का नाम राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से तय करेगी या फिर ‘दिल्ली दरबार’ यानी केंद्र सरकार की पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन की निर्णय प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह पद प्रदेश की नौकरशाही में सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
आने वाले समय में प्रदेश के सामने कई बड़ी चुनौतियां और आयोजन हैं। आगामी वर्षों में होने वाले विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारी और उज्जैन में होने वाले भव्य ‘सिंहस्थ’ जैसे विशाल आयोजन को देखते हुए यह नियुक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार को एक ऐसे अधिकारी की तलाश है जो न केवल अनुभवी हो, बल्कि इन चुनौतीपूर्ण आयोजनों को सुचारू रूप से संपन्न कराने का कौशल भी रखता हो।
सिंहस्थ और चुनावों को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव का चयन सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। प्रशासनिक दक्षता, वरिष्ठता और तालमेल बिठाने की क्षमता ही इस दौड़ में सबसे बड़े मानक होंगे। फिलहाल, कई नामों पर कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय प्रदेश की भविष्य की राजनीति और प्रशासन की दिशा तय करेगा।
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