
दमोह: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में गौशालाओं की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सख्ती देखने को मिली। कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव ने रविवार सुबह विभिन्न गौशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जहां कुछ गौशालाओं की सराहना की गई, वहीं कई जगह लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
किन गौशालाओं का किया गया निरीक्षण?
कलेक्टर ने मारुताल क्षेत्र स्थित वैष्णवी निःस्वार्थ गौसेवा समिति द्वारा संचालित गौशाला का निरीक्षण किया। यहां व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, जिस पर कलेक्टर ने समिति के कार्यों की सराहना की। इसके अलावा आसपास की अन्य गौशालाओं का भी निरीक्षण किया गया, जहां अलग-अलग व्यवस्थाओं का आकलन किया गया।
कहां मिली लापरवाही और क्या दिए निर्देश?
निरीक्षण के दौरान कुछ गौशालाएं बंद पाई गईं, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने और संचालन व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने साफ कहा कि गौशालाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौशालाओं में किन सुविधाओं पर दिया गया जोर?
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गौशालाओं में गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पानी और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उपचार की सुविधाएं और नियमित देखभाल पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, ताकि बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
कलेक्टर का क्या संदेश रहा?
मीडिया से चर्चा के दौरान कलेक्टर यादव ने कहा कि गौ सेवा हमारी संस्कृति, आस्था और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमित मॉनिटरिंग की जाए और व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कमी न रहे।
दमोह में गौशालाओं का यह निरीक्षण प्रशासन की सक्रियता और जवाबदेही का उदाहरण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गौ सेवा से जुड़े कार्यों में लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।
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