
भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। राज्य के अधिकारियों का खुला दावा है कि बिना ‘अंदरूनी संदेश’ के कोई काम नहीं होता। प्रदेश हित के प्रोजेक्टों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, जबकि बड़े निवेशक लाए जाते हैं ताकि सत्ता के गलियारों में कमीशन की होली हो सके।
ब्रांडवाणी समाचार को मिली विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवेशक, छोटे व्यापारी और नए विचारों वाले स्टार्टअप्स को सरकार पूरी तरह से हाशिए पर धकेल दिया गया है। बाहर से आए ग्लोबल निवेशकों के साथ मिलकर अधिकारी-नेता ‘बाहर ही बाहर सौदेबाजी’ कर रहे हैं, ताकि प्रदेश की जनता को भनक तक न लगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जब तक ऊपर से मैसेज न आए, काम रुका रहेगा।” यह सुनते ही साफ हो जाता है कि भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक तंत्र को जड़ से खोखला कर दिया है।
प्रदेश के इनोवेटिव दिमाग अब खुलकर सांस नहीं ले पा रहे। स्टार्टअप्स की नई सोच को कुचल दिया जा रहा है, ताकि सत्ता के चहेतों को फायदा हो। क्या मोहन यादव सरकार ने भ्रष्टाचार को ही आधिकारिक नीति बना लिया है? क्या अधिकारी भयंकर हवा दे रहे हैं इस काले कारोबार को? ब्रांडवाणी समाचार सवाल उठाता है क्या प्रदेश की प्रतिभाओं को हमेशा के लिए दबा दिया जाएगा?
जनता जागे, क्योंकि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के भविष्य का सवाल है। सरकार जवाब दे!







