
सागर| चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। बीएमसी सागर नेत्र प्रत्यारोपण सफलता के तहत बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय की टीम ने तीन जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक कर मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लौटाई। इस सफलता ने न केवल मरीजों बल्कि उनके परिवारों में भी नई उम्मीद जगाई है।
तीन कहानियां, एक नई उम्मीद
बीएमसी सागर के नेत्र रोग विभाग और आई बैंक की टीम ने अलग-अलग समस्याओं से जूझ रहे तीन मरीजों का सफल उपचार किया।
- पहले मामले में 75 वर्षीय बुजुर्ग मजदूर, जो आंख की चोट के कारण पुतली की सफेदी से पीड़ित थे, उन्हें दोहरी सर्जरी का लाभ मिला। डॉक्टरों ने नेत्र प्रत्यारोपण के साथ मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी किया, जो तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था।
- दूसरे मामले में एक गृहणी, जिनकी आंख में संक्रमण हो गया था, उन्हें समय पर कॉर्निया उपलब्ध कराया गया और सफल सर्जरी से उनकी दृष्टि बहाल हुई।
- वहीं तीसरे मरीज, 77 वर्षीय बुजुर्ग, पुतली में सूजन के कारण लंबे समय से देख नहीं पा रहे थे। विशेषज्ञ टीम ने उनकी सर्जरी कर उन्हें फिर से देखने की क्षमता प्रदान की।
यह सभी सर्जरी अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई, जिसमें विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे, आई बैंक प्रभारी डॉ. सारिका चौहान और अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।
नेत्रदान बना उम्मीद की किरण
इस सफलता के पीछे नेत्रदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बीएमसी के आई बैंक में प्राप्त कॉर्निया के कारण ही इन मरीजों को समय पर उपचार मिल सका। डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने बताया कि अब तक 17 नेत्रदान के माध्यम से 25 सफल प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई गंभीर मामलों में नेत्र प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प होता है, जिससे मरीजों को नई रोशनी मिलती है।
उन्होंने समाज से अपील की कि लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं। एक छोटा सा निर्णय किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
बीएमसी सागर की यह सफलता चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। इससे यह साबित होता है कि सही समय पर इलाज और सामाजिक सहयोग से असंभव लगने वाली चीजें भी संभव हो सकती हैं। नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाकर और अधिक लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है।
ब्यूरो रिपोर्ट: मनीष चौबेयह भी पढ़े: रीवा में जन चौपाल पहल, पुलिस सीधे सुनेगी जनता की समस्याएं
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