डीआईपीआर साहब के प्रमोशन आदेश में देरी से विभाग में चर्चा तेज

प्रदेश के एक वरिष्ठ डीआईपीआर अधिकारी इन दिनों अपने प्रमोशन आदेश में हुई देरी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार अधिकारी को उच्च पद पर पदोन्नति की मंजूरी तो मिल गई थी, लेकिन आधिकारिक आदेश जारी होने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। विभाग के भीतर इस देरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और कई अधिकारी इसे फाइलों की धीमी प्रक्रिया से जोड़कर देखने लगे।

सूत्रों के मुताबिक प्रमोशन से जुड़ी फाइल कई दिनों तक अलग-अलग स्तरों पर घूमती रही। बताया जा रहा है कि आदेश पिछले महीने के अंतिम दिनों में जारी होना था, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में अतिरिक्त समय लग गया। विभागीय कर्मचारियों के बीच यह सवाल भी उठता रहा कि आखिर ऐसी कौन सी प्रशासनिक बाधाएं थीं, जिनकी वजह से आदेश समय पर जारी नहीं हो सका। हालांकि विभागीय स्तर पर इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि विभाग में कामकाज का दबाव और लगातार बैठकों के कारण कई फाइलें समय पर निपट नहीं पा रही हैं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि बड़े स्तर की प्रशासनिक मंजूरियों में तकनीकी औपचारिकताओं और अनुमोदन की प्रक्रिया के चलते देरी होना सामान्य बात है। वहीं कुछ लोग इसे विभागीय समन्वय की कमी और फाइल मूवमेंट की धीमी रफ्तार से जोड़कर देख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि प्रमोशन आदेश अंततः जारी हो गया, लेकिन इस देरी ने विभाग के भीतर चर्चा का नया विषय जरूर पैदा कर दिया है। कई कर्मचारी अब यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों की फाइलों में भी इतनी देरी हो सकती है, तो सामान्य कर्मचारियों के मामलों की स्थिति कैसी होगी। फिलहाल विभाग की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ

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gaurav singh rajput

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