
बल्देवगढ़/ धर्मेंद्र सिंह लोधी: बल्देवगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत डारगुवां के कछिया खेरा गांव में महिला स्व-सहायता समूह के सचिव को हटाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता उर्मिला बैध ने पोर्टल पर दर्ज कार्रवाई, समूह की सदस्यता और रसोइया की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आजीविका मिशन के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समूह की कार्यप्रणाली पर कई सवाल
जनपद पंचायत बल्देवगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत डारगुवां के कछिया खेरा गांव में संचालित महिला स्व-सहायता समूह के सचिव को हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में शिकायतकर्ता उर्मिला बैध, पत्नी बृजनंदन बैध, ने संबंधित प्रक्रिया और समूह की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार पोर्टल पर समूह के सचिव को 27 जुलाई को हटाए जाने की कार्रवाई दर्ज बताई जा रही है, लेकिन उनका आरोप है कि इस संबंध में उन्हें समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने इस मामले को लेकर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत करने की बात कही है।
बैठक कर मामला सुलझाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई करने के बजाय संबंधित पक्ष की ओर से आजीविका मिशन और समूह के साथ बैठक कर मामले को आपसी स्तर पर समाप्त करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उर्मिला बैध ने पूरे मामले में प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सचिव को हटाने के निर्णय से संबंधित दस्तावेज और पोर्टल पर दर्ज कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है।
समूह की सदस्यता पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यता को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं, लेकिन इनमें से दो महिलाएं वर्तमान में अन्य स्थानों पर रहती हैं।
समूह से जुड़ी रसोइया की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि संबंधित रसोइया वर्ष 2016 से पहले से इंदौर में रह रही हैं। ऐसे में उन्होंने उनकी वास्तविक उपस्थिति और समूह से जुड़ी भूमिका की जांच की मांग की है।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने समूह की कुछ सदस्यों की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि समूह में शामिल दो महिलाओं की उम्र 60 वर्ष से अधिक है, जबकि समूह की अध्यक्ष की उम्र करीब 62 वर्ष है। इन दावों के आधार पर उन्होंने समूह की सदस्यता और पदाधिकारियों की पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
आजीविका मिशन के अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
मामले में शिकायतकर्ता ने आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सहायक उपखंड अधिकारी राजेश साहू और विकासखंड मैनेजर (आजीविका मिशन) जाबिद रहमान पर संबंधित मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों की दूसरे पक्ष से मिलीभगत अथवा लेन-देन के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और दूसरे पक्ष का इस संबंध में पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
30 जुलाई को जानकारी मांगी, अब तक नहीं मिलने का दावा
उर्मिला बैध के अनुसार उन्होंने 30 जुलाई को मामले से जुड़ी आवश्यक जानकारी मांगी थी, लेकिन कई सप्ताह बीतने के बावजूद उन्हें संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि वह जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक कई बार आवेदन और शिकायतें दे चुकी हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगातार आवेदन देने के बावजूद मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने पोर्टल पर सचिव को हटाए जाने की कार्रवाई की सत्यता की जांच, समूह की सदस्यता और पदाधिकारियों की पात्रता का सत्यापन तथा रसोइया की उपस्थिति और भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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