
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: शिवपुरी के पोहरी क्षेत्र के ऐचवाड़ा गांव स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर ट्रस्ट को लेकर विवाद सामने आया है। ट्रस्ट अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने जिला प्रशासन को शिकायत देकर मंदिर की संपत्ति, भगवान के आभूषण और पुजारी परिवार से जुड़े मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में पुजारी परिवार के साथ मारपीट कर गांव से बाहर करने और पूर्व महंत के निधन के बाद मंदिर की सामग्री ट्रस्ट को नहीं सौंपने के आरोप लगाए गए हैं।
पोहरी क्षेत्र के ग्राम ऐचवाड़ा स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर ट्रस्ट को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने जिला प्रशासन को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में मंदिर की व्यवस्था, पुजारी परिवार, मंदिर की जमीन और ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप ट्रस्ट अध्यक्ष की ओर से प्रशासन को दिए गए शिकायत आवेदन में लगाए गए हैं।
मंदिर को नुकसान पहुंचाने और प्रतिमा खुले में रखने का आरोप
ट्रस्ट की शिकायत के अनुसार मंदिर को क्षति पहुंचाए जाने के बाद भगवान की प्रतिमा को करीब तीन वर्ष तक खुले में रखने की स्थिति बनी रही। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस घटनाक्रम से गांव के श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने प्रशासन से मामले की जांच कर मंदिर की व्यवस्था और धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पुजारी परिवार को गांव से बाहर करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुजारी परिवार के साथ मारपीट की गई और उन्हें गांव से बाहर कर दिया गया। ट्रस्ट की ओर से दावा किया गया है कि पूर्व महंत संत चैऊ बाबा के निधन के बाद मंदिर से संबंधित सामान, भगवान के आभूषण और अन्य सामग्री भी अब तक ट्रस्ट को नहीं सौंपी गई है।
ट्रस्ट अध्यक्ष के अनुसार पूर्व महंत संत चैऊ बाबा ने बंटी उर्फ नरेश शर्मा को मंदिर की जिम्मेदारी सौंपते हुए पूजा-पाठ और सेवा की जिम्मेदारी दी थी।
मंदिर की जमीन को लेकर भी विवाद
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुजारी परिवार को परेशान करने के साथ मंदिर की जमीन को लेकर विवाद खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से मंदिर से जुड़ी संपत्ति और व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक जांच की मांग की गई है।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी रहा तैनात
ट्रस्ट अध्यक्ष ने शिकायत में उल्लेख किया है कि विवाद की स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा करीब तीन महीने तक मंदिर और पुजारी की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। ट्रस्ट का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर परिसर और उससे जुड़ी संपत्तियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
ट्रस्ट की ओर से जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मंदिर और ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पुजारी परिवार के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही विवाद से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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