
नोएडा/राशिद सिद्दीकी की रिपोर्ट: देशभर में आयोजित की जा रही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट CUET-UG परीक्षा के दौरान एक बार फिर परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। नोएडा के आदर्श परीक्षा केंद्र सहित कई राज्यों के परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू नहीं हो सकी, जिससे छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कुछ केंद्रों पर हालात ऐसे बने कि सुबह की परीक्षा को रद्द करना पड़ा और छात्रों ने परीक्षा केंद्रों के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार नोएडा स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र पर सुबह की शिफ्ट के अभ्यर्थी समय से पहुंच गए थे, लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते परीक्षा शुरू नहीं हो पाई। लंबे इंतजार के बाद जब छात्रों को परीक्षा रद्द होने की सूचना मिली तो उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी बार-बार तकनीकी खामियों को रोकने में असफल साबित हो रही है।
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के कई परीक्षा केंद्रों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगहों पर परीक्षा शुरू होने में दो घंटे से अधिक की देरी हुई, जबकि कुछ केंद्रों पर अभ्यर्थियों को असमंजस की स्थिति में घंटों इंतजार करना पड़ा।
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घटना के बाद NTA ने बयान जारी कर तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि की। एजेंसी के अनुसार सर्वर और तकनीकी संचालन से जुड़ी समस्या के कारण परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई। NTA ने कहा कि प्रभावित केंद्रों के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और दोपहर की शिफ्ट की परीक्षा का समय भी संशोधित किया गया है ताकि अभ्यर्थियों को परेशानी न हो।
हालांकि छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उनका आरोप है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार तकनीकी समस्याएं सामने आना परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
गौरतलब है कि NTA इससे पहले NEET समेत कई राष्ट्रीय परीक्षाओं के आयोजन को लेकर भी विवादों और सवालों के घेरे में रह चुका है। ऐसे में CUET-UG परीक्षा के दौरान सामने आई नई अव्यवस्था ने परीक्षा प्रबंधन और तकनीकी तैयारियों को लेकर बहस तेज कर दी है। छात्रों ने मांग की है कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और तकनीकी खामियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है, ताकि छात्रों का विश्वास परीक्षा प्रणाली पर कायम रह सके।
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