*बेतरतीब पार्किंग से जाम, मरीजों की भीड़ और सुविधाओं पर सवाल*

*बेतरतीब पार्किंग से जाम, मरीजों की भीड़ और सुविधाओं पर सवाल* 

 

 *परमआनंद हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर उठ रहे गंभीर सवाल, प्रशासनिक निगरानी की मांग तेज* 

 

*रिपोर्टर :- *जियाउद्दीन अंसारी* 

संभागीय ब्यूरो चीफ शहडोल(म. प्र.)

जन सरोवर प्राइम पत्रिका*

 

 

 *शहडोल*  शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में शामिल परमआनंद हॉस्पिटल इन दिनों अपनी चिकित्सा सेवाओं से अधिक अव्यवस्थित व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल के बाहर सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों का जमावड़ा आए दिन यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। व्यस्त मार्ग पर लगने वाले जाम से मरीजों, उनके परिजनों और आम राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही।

 

अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों के कक्ष के बाहर लंबी कतारें आम बात हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या मरीजों और उनके परिजनों के बैठने, प्रतीक्षा करने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई है? कई लोगों का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले सुविधाएं अपर्याप्त दिखाई देती हैं।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में परामर्श शुल्क से लेकर भर्ती और डिस्चार्ज तक अच्छी-खासी राशि ली जाती है, लेकिन उसी अनुपात में पार्किंग, प्रतीक्षालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया है। तीन मंजिला इस अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं, फिर भी समुचित पार्किंग व्यवस्था का अभाव आसपास की सड़कों पर अव्यवस्था का कारण बन रहा है।

 

लोगों का यह भी कहना है कि यदि अस्पताल के बाहर ही यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है तो आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति मरीजों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से चिंता का विषय है।

 

अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित सभी मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जा रहा है? इन व्यवस्थाओं की समय-समय पर जांच होती है या नहीं, इसे लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

 

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और यातायात पुलिस से मांग की है कि अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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