
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इसलिए विद्यार्थियों के हित में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी अभी से शुरू की जाए। उन्होंने रोजगारपरक और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को उच्च शिक्षा का प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया।
मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता सुधार और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार बड़े कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन क्षेत्रों में आबादी अधिक है और कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहां प्रातः और सायंकालीन शिफ्ट में शिक्षण व्यवस्था शुरू करने पर भी विचार किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य स्तर पर ‘सैक’ (स्टेट असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल) के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कृषि विषय के स्नातक पाठ्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थी कृषि शिक्षा से जुड़ चुके हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई देते हुए कहा कि कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ना राज्य के विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएमश्री महाविद्यालयों सहित सभी शासकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों की रुचि और बदलते रोजगार बाजार को ध्यान में रखते हुए नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर विशेष बल दिया।
ये भी पढ़े – बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव पर बवाल, एनएसयूआई और माकपा ने खोला मोर्चा
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन प्रबंधन (बीबीए) पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं, जबकि पिछले वर्ष 83 नए शोध केंद्र शुरू किए गए थे। आगामी समय में 100 और नए शोध केंद्र स्थापित करने की योजना है।
उच्च शिक्षा विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। जहां देश में जीईआर में 1.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं मध्यप्रदेश ने 1.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में भी प्रदेश की उच्च शिक्षण संस्थाओं का प्रदर्शन बेहतर रहा है। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी ने 27वीं रैंक और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर ने 49वीं रैंक प्राप्त की है। इसके अलावा प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है।
मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा स्थित राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में नए और उपयोगी विषयों को शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान जैसे क्षेत्रों में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं और इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांग और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रमों का चयन किया जाना चाहिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग तकनीक आधारित शिक्षा को लगातार बढ़ावा दे रहा है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीकरण के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। जुलाई 2026 सत्र में भी 2 लाख 73 हजार 266 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय तथा आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया है। इसके अलावा आठ महाविद्यालयों में 28 विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू की गई हैं।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के “वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन” पोर्टल पर प्रदेश के 618 उच्च शिक्षण संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं। इस पोर्टल का लाभ 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उठा चुके हैं। इस उपलब्धि में भी मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पांच हजार से अधिक फैकल्टी और स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि मनोबल सत्रों में 71 हजार 705 विद्यार्थियों ने भाग लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष विशेषज्ञ समितियों का गठन किया गया है। प्रदेश के 55 शासकीय महाविद्यालयों को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उन्नत किया गया है, जहां आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार किया गया है। तकनीकी नवाचारों के तहत 10 संभागीय मुख्यालयों पर डिजिटल स्टूडियो स्थापित किए गए हैं। ई-ज्ञान सेतु चैनल के माध्यम से हिंदी के साथ बुंदेली, बघेली और मालवी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
ई-प्रवेश प्रक्रिया के लिए मोबाइल एप शुरू किया गया है, जबकि सार्थक एप के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी प्राप्त की जा रही है। विश्वविद्यालयों को समर्थ सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है। प्रदेश के आठ महाविद्यालयों में एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब स्थापित की जा रही हैं। वहीं आईआईटी दिल्ली के सहयोग से 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। गैर हिंदी भारतीय भाषाओं में अध्ययन की व्यवस्था विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का संचालन प्राथमिकता से किया जाए। आवश्यकता अनुसार पार्ट टाइम कॉलेज शुरू किए जाएं और सुबह-शाम की शिफ्ट में शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाए। जरूरत पड़ने पर सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का उपयोग भी महाविद्यालय संचालन के लिए किया जा सकता है। साथ ही 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर, कृषि विज्ञान सहित विभिन्न व्यावसायिक विषयों के अध्ययन के लिए आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार की संभावनाओं और प्रदेश के विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
ये भी पढ़े – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा कदम: काफिले में शामिल की इलेक्ट्रिक कार, ‘विकसित भारत 2047’ का दिया संदेश
- mp-higher-education-review-new-colleges-shift-system-employment-courses-mohan-yadav







