बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव पर बवाल, एनएसयूआई और माकपा ने खोला मोर्चा

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव पर चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय की कार्य समिति द्वारा नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर शासन को मंजूरी के लिए भेजे जाने के बाद छात्र संगठन एनएसयूआई और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

इस फैसले के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ ‘सद्बुद्धि हवन’ का आयोजन किया। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित संस्थान देश के महान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान का प्रतीक है और इसका नाम बदलना देश के गौरवशाली इतिहास और प्रदेश की शैक्षणिक विरासत के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, शोध और भ्रष्टाचार जैसे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नाम बदलने की राजनीति कर रही है।

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दूसरी तरफ, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस आजादी के आंदोलन के वास्तविक नायकों का सम्मान नहीं करना चाहते, इसलिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 7 जुलाई 1854 को भोपाल में जन्मे मौलाना बरकतउल्ला भोपाली स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत थे, जिन्होंने साल 1915 में गदर लहर के दौरान विदेश में भारत की पहली निर्वासित सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई थी। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के राष्ट्रपति रहते हुए मौलाना बरकतउल्ला इस निर्वासित सरकार के पहले प्रधानमंत्री बने थे, जिसने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकते हुए देश में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद की स्थापना का लक्ष्य रखा था। माकपा नेता ने चेतावनी दी है कि स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महान नायक के नाम को हटाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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    Rashel Kachwah Rajput

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