
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी है। खास बात यह है कि नीलेकणि 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बावजूद सरकार ने उनकी तकनीकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी है।
1. कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव
नंदन नीलेकणि ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें भाजपा उम्मीदवार अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा।
2. ‘आधार’ परियोजना के प्रमुख चेहरों में रहे
नीलेकणि को भारत की आधार (UIDAI) परियोजना का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है। उनके नेतृत्व में देश में डिजिटल पहचान प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, जिसने सरकारी सेवाओं की डिजिटल पहुंच को मजबूत किया।
3. डिजिटल पेमेंट और टेक्नोलॉजी सुधार में बड़ा योगदान
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई जैसे तकनीकी इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने में भी नंदन नीलेकणि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी अनुभव के कारण उन्हें तकनीक आधारित सुधारों का विशेषज्ञ माना जाता है।
4. AI और डिजिटल गवर्नेंस में भी निभा चुके हैं भूमिका
नीलेकणि विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी समितियों में योगदान दे चुके हैं। उन्हें डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में अनुभवी विशेषज्ञ माना जाता है।
5. परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की मिली कमान
नीट समेत विभिन्न परीक्षा विवादों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणि करेंगे, जो परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों पर अपनी रिपोर्ट देंगे।
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