
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में करीब 48 साल पहले हुए सांप्रदायिक दंगों के शिकार और पलायन करने वाले परिवारों को न्याय देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दंगे के दौरान अपना सब कुछ खोकर दिल्ली में शरण लेने वाले रस्तोगी परिवार को संभल जिला प्रशासन द्वारा जमीन का पहला आवासीय पट्टा सौंप दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहकारिता एवं संभल जिले के प्रभारी मंत्री जे.पी.एस. राठौर की मौजूदगी में वैदिक रीति-रिवाज से भूमि पूजन और हवन करने के बाद पीड़ित परिवार को मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे गए।
क्या है पूरी घटना और विवाद?
1978 का खौफनाक दंगा: 29 मार्च 1978 को संभल में भीषण सांप्रदायिक दंगा भड़का था। इस हिंसा में तत्कालीन व्यापारी रामशरण दास रस्तोगी की दुकान को उपद्रवियों ने लूटकर आग के हवाले कर दिया था और उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। बेरहमी की हद यह थी कि उनके शव के टुकड़े कर एक कुएं में फेंक दिए गए थे, जिस पर चाकू के 109 निशान मिले थे। इस घटना के बाद लगातार मिल रही धमकियों से डरकर रस्तोगी परिवार 1979 में संभल से दिल्ली पलायन कर गया था।
कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त हुई जमीन: संभल के सदर कोतवाली क्षेत्र के शेर खां सराय (आलम सराय देहात) इलाके में करीब 3 बीघा सरकारी जमीन पर कब्रिस्तान का अवैध कब्जा था। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने करीब 10 महीने पहले (12 अगस्त 2025 को) इस पूरी सरकारी जमीन को बुलडोजर चलाकर भू-माफियाओं और अवैध कब्जे से मुक्त कराया था।
48 साल बाद मिला इंसाफ, जेपीएस राठौर ने किया भूमि पूजन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में संभल दंगों का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन ने फाइलों को दोबारा खोला और पीड़ितों की तलाश शुरू की। इसी कड़ी में गुरुवार 4 जून को मृतक रामशरण दास रस्तोगी की पुत्रवधू रुक्मणी (रुकमन) रस्तोगी और उनके पोते कपिल रस्तोगी को उसी कब्जामुक्त जमीन में से 100 वर्ग मीटर (लगभग 100 गज) का आवासीय पट्टा आधिकारिक रूप से आवंटित कर दिया गया। भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री जे.पी.एस. राठौर, मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई मौजूद रहे।
कमिश्नर की अपील: सबूत लाएं, जमीन पाएं
मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह पुनर्वास प्रक्रिया का केवल पहला चरण है। उन्होंने दंगे के कारण संभल से पलायन करने वाले अन्य सभी परिवारों से अपील की है कि जिनके पास भी उस दौर के विस्थापन, नुकसान या नागरिकता से जुड़े वैध दस्तावेज या सबूत हैं, वे जिला प्रशासन से संपर्क करें। जांच के बाद सरकार उन सभी पात्र परिवारों को संभल में दोबारा आशियाना बनाने के लिए जमीन के पट्टे आवंटित करेगी।
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