
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती आबादी और महानगरों पर बढ़ते शहरी दबाव को कम करने के लिए योगी सरकार ने एक बेहद दूरगामी और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो आने वाले समय में सूबे के शहरी नक्शे को पूरी तरह बदल देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए अत्याधुनिक ‘सैटेलाइट टाउन’ (नए शहर) विकसित करने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही कैबिनेट ने जेलों में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति और जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत पुराने नक्शों को वैध करने समेत कुल तीन बड़े जनहित के फैसलों पर अपनी मुहर लगाई है।
1. 3500 करोड़ का बजट: आगरा, बरेली और प्रयागराज में बनेंगे नए शहर
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के चलते बढ़ते पलायन और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ‘मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना’ को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
सीड कैपिटल और वित्तीय सहायता: योजना के तहत नए शहरों के लिए जमीन अधिग्रहण (लैंड पूलिंग/अधिग्रहण) पर आने वाले कुल खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार विकास प्राधिकरणों को ‘सीड कैपिटल’ (शुरुआती फंड) के रूप में देगी, जिसे अधिकतम 20 वर्षों में वापस करना होगा।
बजट और पहली किस्त: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना में 3,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजटीय प्रावधान किया है। कैबिनेट ने तीनों शहरों के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये की सीड कैपिटल स्वीकृत करते हुए, जमीन अधिग्रहण और शुरुआती काम चालू करने के लिए 225 करोड़ रुपये की पहली किस्त तत्काल जारी करने के आदेश दिए हैं।
इन तीन शहरों का ही चयन क्यों?
आगरा: विश्व पर्यटन के नक्शे पर होने के कारण यहां आर्थिक गतिविधियों का और विस्तार किया जाएगा।
बरेली: यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बड़े व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
प्रयागराज: प्रशासनिक, शैक्षणिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर में महाकुंभ 2025 के बाद विकास की संभावनाएं और अधिक बढ़ गई हैं।
2. जेल में बंदियों की अप्राकृतिक मौत पर मिलेगी समयबद्ध मुआवजा राशि
मानवाधिकारों की रक्षा और जेल प्रशासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से योगी कैबिनेट ने कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में एक नई नीति को मंजूरी दी है। अब तक ऐसे मामलों में पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा मिलने में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग NHRC की लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण काफी वक्त लग जाता था। नई नीति के तहत अब जेल में बंदियों की अप्राकृतिक मौत होने पर उनके आश्रितों या निकटतम संबंधियों को एक तय समयसीमा के भीतर व्यवस्थित तरीके से मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा। सरकार इसके लिए जल्द ही एक विस्तृत गाइडलाइन (SOP) जारी करेगी।
3. आम जनता को बड़ी राहत: जिला पंचायत के पुराने नक्शे होंगे मान्य
शहरी विकास से जुड़े एक और अहम फैसले में कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में आने वाले उन इलाकों के लोगों को बड़ी राहत दी है, जिनके मकान/भवन का मानचित्र (नक्शा) पहले जिला पंचायत द्वारा पास किया गया था। बाद में उन क्षेत्रों के विकास प्राधिकरण के दायरे में आ जाने से इन नक्शों की वैधता पर विवाद खड़ा हो गया था। अब सरकार ने इन पुराने स्वीकृत मानचित्रों के ‘विनियमतीकरण’ को हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा, जिन विस्तारित विकास क्षेत्रों में अभी तक महायोजना तैयार नहीं हो सकी है, वहां भी भवन निर्माण के लिए एक स्पष्ट ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ SOP बनाई जाएगी, ताकि लोग बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के वैध तरीके से नक्शा पास करवा सकें।
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