
भोपाल: मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव के तहत सोमवार 8 जून को नामांकन का आखिरी दिन है। इस आखिरी दिन सूबे का सियासी माहौल बेहद गर्म रहने वाला है। एक तरफ जहां कांग्रेस की ओर से घोषित उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगी, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और रणनीतिकारों की नजरें भोपाल से लेकर दिल्ली तक टिकी रहेंगी। दिल्ली से लेकर भोपाल तक इस बात को लेकर कयासबाजी तेज है कि क्या भाजपा अपनी तीसरी सीट के लिए भी कोई सरप्राइज कैंडिडेट मैदान में उतारेगी या नहीं। इसी सस्पेंस के कारण दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने विधायकों को सोमवार तक अनिवार्य रूप से भोपाल में ही रहने के निर्देश जारी किए हैं।
तीसरी सीट पर सस्पेंस बरकरार, सीएम और मंत्रियों के बयानों से बढ़ी हलचल
हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहले ही तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की संभावना से इनकार कर चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया संकेतों और बयानों ने अटकलों के बाजार को फिर से गर्म कर दिया है। इसके साथ ही सरकार के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मीडिया में बयान देकर सनसनी फैला दी है। विजयवर्गीय ने कहा है कि यदि पार्टी आलाकमान तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने का फैसला करता है, तो उसे भी जिताने की पूरी कोशिश की जाएगी।
भाजपा ने पहले ही अपनी दो सीटों पर राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ और प्रदेश उपाध्यक्ष रजनीश अग्रवाल को चुनावी मैदान में उतारा है, जिन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। चर्चा है कि यदि भाजपा आखिरी वक्त पर तीसरा दांव खेलती है, तो निमाड़, मालवा या महाकौशल अंचल से किसी आदिवासी महिला चेहरे को आगे लाया जा सकता है। यह सीट सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल पूरा होने से खाली हो रही है।
कांग्रेस में विरोध के स्वर, दिग्गजों ने संभाली कमान
उधर, कांग्रेस खेमे में मीनाक्षी नटराजन के नाम के ऐलान के बाद आंतरिक स्तर पर विरोध के स्वर उभरकर सामने आए थे। डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस पदाधिकारियों ने तुरंत विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम दिग्गज नेताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए नटराजन की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करने का दावा किया है। अगर भाजपा तीसरा प्रत्याशी घोषित करती है, तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में क्रॉस वोटिंग, वोट रद्द होने या विधायकों की अनुपस्थिति का खतरा खेल बिगाड़ सकता है।
समझिए राज्यसभा का पूरा ‘नंबर गेम’
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में रणनीतिक गणित बेहद दिलचस्प है:
- कुल सीटें: 230 (1 सीट वर्तमान में रिक्त है)2.
- जीत के लिए जरूरी आंकड़े: तीन सीटों पर हो रहे इस चुनाव में एक सीट जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 58 विधायकों के प्रथम वरीयता के मतों की आवश्यकता होगी।
- भाजपा की स्थिति: 164 विधायकों के साथ भाजपा अपने दो उम्मीदवारों (तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल) को आसानी से जिता सकती है। दो उम्मीदवारों की जीत (58+58 = 116 वोट) के बाद भी भाजपा के पास 48 अतिरिक्त वोट बचेंगे।
- कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस के पास कुल 64 विधायक हैं। हालांकि, दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने से एक सीट रिक्त है, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट की रोक है, और बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला विधानसभा में लंबित है। इस तरह कांग्रेस के प्रभावी वोटों की संख्या घटकर 62 रह जाती है। जीत के लिए 58 वोट जरूरी हैं, जो कांग्रेस के पास मौजूद हैं।
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