मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महेश केवट को बनाया तीसरा उम्मीदवार; अब क्रॉस-वोटिंग पर टिकी नजरें

भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए होने वाला मुकाबला बेहद दिलचस्प और रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुंदेलखंड क्षेत्र के जमीनी नेता महेश केवट को अचानक अपना तीसरा उम्मीदवार घोषित कर नामांकन दाखिल करवा दिया है। भाजपा के इस अप्रत्याशित कदम ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, क्योंकि इस सीट पर जीत के लिए अब क्रॉस-वोटिंग का सहारा जरूरी हो गया है।

जीत के लिए ‘क्रॉस-वोटिंग’ पर टिकी भाजपा की नजरें

मध्य प्रदेश विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, पहली दो राज्यसभा सीटों पर सुरक्षित जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के पास केवल 48 अतिरिक्त वोट बचते हैं। ऐसे में तीसरी सीट पर अपने उम्मीदवार महेश केवट की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा को कम से कम 10 अतिरिक्त मतों की दरकार होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की नजरें मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों में सेंधमारी और क्रॉस-वोटिंग के जरिए इन 10 वोटों का जुगाड़ करने पर टिकी हैं।

आखिरी वक्त में महेश केवट पर दांव; जानें जातीय और क्षेत्रीय समीकरण

बुंदेलखंड के निवारी जिले से आने वाले महेश केवट अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आने वाले केवट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सप्ताहांत में राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के बीच हुए गहन विचार-विमर्श और दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद आखिरी वक्त पर उनके नाम पर मुहर लगाई गई। भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि बुंदेलखंड अंचल में केवट समाज पर उनका मजबूत प्रभाव और जमीनी पकड़ पार्टी के लिए एक बड़ी कूटनीतिक संपत्ति साबित होगी। यह चयन आगामी चुनावों के लिहाज से सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद का हिस्सा है।

निष्कासन से बोर्ड अध्यक्ष और अब राज्यसभा टिकट तक का सफर

महेश केवट का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व में नगरीय निकाय चुनावों के दौरान उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें 6 साल के लिए भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की मजबूत पृष्ठभूमि और शीर्ष नेताओं से जुड़ाव के चलते उन्होंने न सिर्फ पार्टी में वापसी की, बल्कि हाल ही में 24 अप्रैल को राज्य सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण और मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) भी नियुक्त किया था।

दिग्विजय सिंह की सीट पर मीनाक्षी नटराजन से मुकाबला

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा के तीन सदस्यों का कार्यकाल आगामी 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें से दो सीटें वर्तमान में भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस की इस सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कर रहे हैं, जिन्होंने इस बार चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस ने उनकी जगह पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, भाजपा ने अपनी शुरुआती दो सुरक्षित सीटों के लिए पहले ही रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ को मैदान में उतारा है, जिससे अब तीसरी सीट का यह मुकाबला मीनाक्षी नटराजन बनाम महेश केवट के रूप में तब्दील हो चुका है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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