
राज्य के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक वरिष्ठ एसीएस अधिकारी की नई पदस्थापना सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। लंबे समय तक अलग-अलग महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं देने के बाद अब उन्हें ऐसे विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे मंत्रालय के भीतर बेहद अहम माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस नई तैनाती को कई अधिकारी उनके प्रशासनिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रहे हैं। मंत्रालय में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सरकार ने उन्हें एक ऐसे विभाग की कमान सौंपी है, जो सीधे बड़े विकास कार्यों, करोड़ों रुपये की परियोजनाओं और जनहित से जुड़े फैसलों से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि इस नई जिम्मेदारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में उत्सुकता भी है और उम्मीदें भी। हालांकि सरकार की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन विभाग के महत्व को देखते हुए इस नियुक्ति ने पूरे मंत्रालय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
सूत्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारी अपनी सख्त कार्यशैली और फाइलों के गहन अध्ययन के लिए जाने जाते हैं। बताया जाता है कि वे किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले उससे जुड़े हर पहलू की विस्तार से समीक्षा करते हैं और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचते हैं। यही वजह है कि उनके पास आने वाली फाइलों का निपटारा पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही होता है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद भी विभागीय अधिकारियों का मानना है कि वे अपनी इसी कार्यशैली को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि इस विभाग की प्रकृति पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यहां बड़े स्तर की परियोजनाओं, वित्तीय स्वीकृतियों और समयबद्ध फैसलों की लगातार आवश्यकता रहती है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि नए एसीएस इन चुनौतियों का सामना किस तरह करते हैं और विभाग की कार्यप्रणाली को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
मंत्रालय के भीतर यह भी चर्चा है कि नई जिम्मेदारी केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि यह अधिकारी की प्रशासनिक क्षमता की वास्तविक परीक्षा भी होगी। सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग पर शासन स्तर से लगातार निगरानी रहती है और यहां लिए गए निर्णयों का सीधा असर विकास कार्यों तथा आम जनता से जुड़े मुद्दों पर पड़ता है। ऐसे में अब अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित मामलों का समय पर निराकरण, परियोजनाओं की गति बनाए रखना और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगी। विभागीय हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि केवल विभाग बदलने से कार्यशैली नहीं बदलती, बल्कि नई जिम्मेदारी के अनुरूप परिणाम देना ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान बनाता है। फिलहाल मंत्रालय में इस नई पोस्टिंग को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और सभी की नजर आने वाले दिनों में अधिकारी के फैसलों, कार्यशैली और विभागीय प्रदर्शन पर टिकी हुई है।
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