आयुष्मान योजना में अधिकारियों की बैठक से बाहर निकाले गए अफसर? स्वास्थ्य विभाग में बढ़ी अंदरूनी खींचतान

प्रदेश में गरीब बच्चों और जरूरतमंद परिवारों से जुड़ी महत्वपूर्ण आयुष्मान योजना को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अंदर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। योजना के संचालन और नई गाइडलाइन को लेकर बुलाई गई बैठक में कथित तौर पर कुछ अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कहे जाने की चर्चा सामने आई है। इस घटनाक्रम के बाद विभागीय गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बैठक के दौरान ऐसी स्थिति क्यों बनी। हालांकि, पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों या विभाग की ओर से सामने नहीं आई है।

जानकारी के अनुसार, आयुष्मान योजना से जुड़े कार्यों को लेकर हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में योजना के संचालन, प्रक्रियाओं में बदलाव और नई व्यवस्था लागू करने जैसे विषयों पर चर्चा होनी थी। इसी दौरान अधिकारियों की मौजूदगी और भूमिका को लेकर विवाद की स्थिति बनने की बात सामने आई है। कुछ लोगों का दावा है कि बैठक में शामिल कुछ अधिकारियों को बाहर जाने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के भीतर नाराजगी और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

इस घटनाक्रम को लेकर विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है। आयुष्मान जैसी जनकल्याणकारी योजना सीधे गरीब और जरूरतमंद लोगों से जुड़ी हुई है, ऐसे में प्रशासनिक मतभेद या आपसी समन्वय की कमी का असर जमीनी स्तर पर पड़ सकता है। वहीं, विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता जरूरी है ताकि कामकाज में किसी प्रकार की बाधा न आए।

घटना के बाद मंत्रालय और स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह केवल बैठक में अनुशासन से जुड़ा मामला था या फिर विभाग के भीतर किसी बड़े प्रशासनिक मतभेद का संकेत है। क्या वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा या फिर इस मामले में कोई औपचारिक कदम उठाया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल आयुष्मान योजना से जुड़े इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक तालमेल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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gaurav singh rajput

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