
देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ने से बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 19 राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इनमें से 7 राज्यों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मानसून की इस सुस्ती का असर खेती-किसानी के साथ-साथ पेयजल और बिजली की मांग पर भी दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में किसान समय पर बुआई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उत्तर भारत और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण गर्मी ने फिर से जोर पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश समेत कम से कम 7 राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। दिन के समय तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसूनी हवाओं की कमजोर सक्रियता और कुछ क्षेत्रों में बने उच्च दबाव के कारण वर्षा गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। कई जिलों में खेत सूखे पड़े हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। वहीं जलाशयों और बांधों में जलस्तर बढ़ने की रफ्तार भी अपेक्षा से कम बनी हुई है।
हालांकि मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में इस तरह के अस्थायी ब्रेक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल देश के करोड़ों लोग और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
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