MPMKVVCL का महा-घोटाला: क्या ‘सर्वर डाउन’ के बहाने मध्य प्रदेश की जनता की जेब पर सरेआम डकैती डाल रहा है बिजली विभाग?

 ‘ब्रांडवाणी समाचार’ का बड़ा खुलासा: सरकारी लापरवाही या सुनियोजित लूट? विभाग की चौखट पर चार चक्कर काटने के बाद भी जवाब सिर्फ एक— “सर्वर डाउन है!

भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग (MPMKVVCL) इन दिनों आम जनता के लिए ‘रोशनी’ कम और ‘बर्बादी का अंधेरा’ ज्यादा लेकर आ रहा है। नियम, कानून और पारदर्शिता को ताक पर रखकर मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPMKVVCL) ने उपभोक्ताओं को लूटने का एक नया और आधुनिक तरीका ढूंढ निकाला है— “फर्जी बिलिंग और सर्वर डाउन का खेल!”

‘ब्रांडवाणी समाचार’ के हाथ लगे पुख्ता दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत यह चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि कैसे एक आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है और उसकी गाढ़ी कमाई पर सरेआम डाका डाला जा रहा है।

भोपाल शहर के उपभोक्ता संदीप श्रीवास्तव (IVRS क्रमांक: N2603005483) के मामले ने बिजली विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

1. पहला झटका (2 जून 2026): विभाग द्वारा जून महीने की शुरुआत में कुल ₹6,631 का बिल (Current Payable Amount) दर्शाया गया। डिजिटल भुगतान ऐप (GPay) पर भी यही राशि दिखाई दे रही थी।

2. दूसरा झटका और महा-लूट (22 जून 2026): कुछ ही दिनों के भीतर अचानक इस बिल की राशि को बढ़ाकर सीधे ₹14,449 कर दिया गया! उपभोक्ता ने जब 22 जून 2026 को शाम 5:13 बजे इस राशि का भुगतान किया, तब जाकर इस अंधी लूट का खुलासा हुआ।

3. सरकारी बिल में खुद विभाग की चोरी पकड़ी गई: जब मूल कागजी बिल की बारीकी से जांच की गई, तो उसमें “Total Amount Payable” के कॉलम में -₹7427.00 (माइनस सात हजार चार सौ सत्ताइस रुपये) साफ लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं। यानी तकनीकी रूप से विभाग को उपभोक्ता से ₹7,427 ज्यादा लेने ही नहीं थे, बल्कि वह राशि समायोजित (Adjust) होनी थी। इसके बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर जबरन ₹14,449 की वसूली कर ली गई!

इस भारी गड़बड़ी और करीब ₹7,427 की सरेआम अतिरिक्त वसूली के खिलाफ जब पीड़ित उपभोक्ता न्याय की आस में MPEB के मुख्य कार्यालय पहुंचा, तो वहां अधिकारियों का रवैया बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना था।

उपभोक्ता एक, दो या तीन बार नहीं, बल्कि पूरे चार बार बिजली दफ्तर के चक्कर काट चुका है, लेकिन हर बार साहबों की कुर्सी से सिर्फ एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है— “अभी सर्वर डाउन है, बाद में आना!”

सवाल यह उठता है कि जब जनता से पैसा वसूलना होता है, तब तो आपका सर्वर पलक झपकते ही काम करने लगता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन सेकंडों में ‘सक्सेसफुल’ हो जाता है। लेकिन जब विभाग की चोरी पकड़ी जाती है, जब जनता को रिफंड देने या बिल सुधारने की बात आती है, तो सरकारी सर्वर को अचानक कौन सा लकवा मार जाता है?

मप्र की जनता की आवाज़ उठाते हुए ‘ब्रांडवाणी समाचार’ बिजली कंपनी के प्रबंधन और प्रदेश सरकार से सीधे सवाल करता है:

बिजली विभाग के इस तानाशाही और भ्रष्ट रवैये ने यह साबित कर दिया है कि इन्हें न तो उपभोक्ताओं की परेशानी से कोई सरोकार है और न ही अपनी साख की चिंता। ‘ब्रांडवाणी समाचार’ इस मामले को तब तक उठाता रहेगा जब तक पीड़ित उपभोक्ता को उसका पाई-पाई का रिफंड नहीं मिल जाता और इस ‘सर्वर डाउन’ के खेल के पीछे बैठे असली चेहरों को बेनकाब नहीं कर दिया जाता।

ब्यूरो रिपोर्ट, ब्रांडवाणी समाचार।

  • Shruti Soni

    ब्रांडवाणी समाचार

    अनुभवी पत्रकार। हर दिन ताज़ा और सटीक खबरों के साथ आपकी सेवा में। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहराई से तथ्य प्रस्तुत करना मेरी पहचान है।

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