अमेरिका में बच्ची से रेप केस के बाद Snapchat पर मुकदमा, ऐप के फीचर पर गंभीर सवाल

अमेरिका में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Snapchat कानूनी विवाद के केंद्र में आ गया है। पीड़िता के परिवार ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि ऐप के कुछ फीचर्स ने कथित आरोपी को बच्ची तक पहुंचने और उससे संपर्क स्थापित करने में मदद की। मुकदमे में दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म की डिजाइन और सुरक्षा व्यवस्था बच्चों को संभावित ऑनलाइन खतरों से पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं रख सकी। हालांकि, ये आरोप अदालत में लगाए गए दावे हैं और अभी इन पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है। मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी, नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर वैश्विक बहस तेज कर दी है।

याचिका में कहा गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर Snapchat के माध्यम से पीड़िता से संपर्क बनाया और धीरे-धीरे उसका विश्वास जीतकर अपराध को अंजाम दिया। परिवार का आरोप है कि यदि प्लेटफॉर्म पर अधिक प्रभावी सुरक्षा उपाय, बेहतर आयु सत्यापन प्रणाली और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी होती, तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था। दूसरी ओर, तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण जरूर होती है, लेकिन अपराध के लिए कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, प्लेटफॉर्म की नीतियों और संबंधित कानूनों के आधार पर करती है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Snapchat भारत में भी बेहद लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप बन चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में इसके करीब 25 करोड़ मासिक सक्रिय (Monthly Active) यूजर्स हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवा और किशोर वर्ग की है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा, अभिभावकीय निगरानी, प्राइवेसी सेटिंग्स और डिजिटल जागरूकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय अनजान लोगों से बातचीत, निजी जानकारी साझा करने और लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने से बचना चाहिए। वहीं अभिभावकों को भी समय-समय पर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने और उन्हें साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।

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gaurav singh rajput

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