
जीतू पटवारी का डॉ. मोहन यादव सरकार पर बड़ा आरोप— क्या जमीनी हकीकत में तब्दील हो पाए वादे?
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों दावों और आरोपों का दौर चरम पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार जहां राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार के ऐतिहासिक आंकड़े पेश कर रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इन आंकड़ों को पूरी तरह हवा-हवाई बता रहा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को घेरते हुए सीधे सवाल दागे हैं कि ‘इन्वेस्टर मीट’ के बड़े-बड़े विज्ञापनों और सरकारी नौकरियों के वादों की जमीनी सच्चाई क्या है?
आज ब्रांडवाणी समाचार की इस विशेष रिपोर्ट में हम विश्लेषण करेंगे कि क्या सरकार अपने दावों को पूरा कर पाई है या जनता के सामने सिर्फ कागजी आंकड़े परोसे जा रहे हैं। आइए देखते हैं यह विस्तृत रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव की सरकार बनने के बाद से ही विकास के नए रोडमैप और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारियां जोरों पर हैं। सरकार ने राज्य के स्थापना दिवस पर एक ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ जारी किया, जिसमें आने वाले वर्षों में प्रदेश के युवाओं को 1 करोड़ रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर देने का महत्वाकांक्षी संकल्प लिया गया है। सरकार का दावा है कि विभिन्न इन्वेस्टर मीट और विदेशी दौरों, जैसे यूएई और स्पेन यात्रा से राज्य को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे हजारों रोजगार सृजित होंगे। साथ ही, पुलिस विभाग में 22,000 नियमित पदों सहित अन्य विभागों में भर्तियां निकालने की बात कही गई है।
सरकार का पक्ष:
- आगामी वर्षों में 1 करोड़ रोजगार के अवसरों का विज़न।
- पुलिस विभाग में 22,000 सरकारी पदों पर नियमित भर्ती का लक्ष्य।
- ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के माध्यम से लाखों करोड़ के निवेश प्रस्तावों का दावा।
लेकिन, सरकार के इन दावों के विपरीत विपक्ष यानी कांग्रेस पार्टी पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि भाजपा सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट कर रही है। पटवारी के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकारों की तरह इस सरकार में भी बड़ी-बड़ी ‘प्राइवेट इन्वेस्टर मीट’ तो आयोजित की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर न तो कोई बड़ा उद्योग लग रहा है और न ही युवाओं को स्थायी नौकरियां मिल रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश का युवा आज भी पटवारी परीक्षा, शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी परीक्षाओं के परिणामों और नियुक्तियों के लिए भटक रहा है।
कांग्रेस लगातार सरकार से यह मांग कर रही है कि वह पिछले डेढ़ से दो साल के भीतर वास्तव में दी गई सरकारी नौकरियों का ‘श्वेत पत्र’ जारी करे। विपक्ष का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार जो आंकड़े बता रही है, वे केवल कागजी वादे हैं जिन्हें धरातल पर पूरा नहीं किया जा सका है।
इस पूरे मामले में सच क्या है, यह तो आने वाले समय में प्रदेश की जनता ही तय करेगी। लेकिन एक बात साफ है कि मध्य प्रदेश में ‘बेरोजगारी’ और ‘औद्योगिक निवेश’ आगामी चुनावों और विधानसभा सत्रों में सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बने रहने वाले हैं। जहां सरकार अपने विज़न डॉक्यूमेंट को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस इसे युवाओं के साथ छलावा करार दे रही है।







