
मध्य प्रदेश के एक जिले में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उस समय प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब एक केंद्रीय मंत्री ने मंच से ही जिले के कलेक्टर की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जाहिर कर दी। जानकारी के अनुसार, मंत्री पिछले कुछ समय से जिला प्रशासन के कामकाज से संतुष्ट नहीं थे और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार फीडबैक ले रहे थे। बताया जा रहा है कि मंत्री ने इससे पहले भी संबंधित अधिकारियों तक अपनी नाराजगी पहुंचाई थी, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण उन्होंने सार्वजनिक मंच से अपनी बात रखने का फैसला किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं करेगा तो जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि “अगर मेरे क्षेत्र की जनता को परेशानी होगी तो मैं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।” मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन को जनता के प्रति अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनने की नसीहत भी दी।
सूत्रों के मुताबिक, यह पहला अवसर नहीं है जब केंद्रीय मंत्री ने जिला प्रशासन पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी जिले में पेयजल संकट और अन्य जनसमस्याओं को लेकर उन्होंने कलेक्टर को खरी-खोटी सुनाई थी। लगातार मिल रही शिकायतों और विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर मंत्री पहले भी अधिकारियों को चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से दोबारा सामने आई नाराजगी को प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा सकती है और अधिकारियों को जनहित से जुड़े मामलों में अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं। फिलहाल मंत्री की सख्त टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना प्राथमिकता होगी।
- kendriya-mantri-naraz-collector-public-program-madhya-pradesh-news








