
ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि किसानों और मजदूरों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को समय-समय पर ज्ञापन देकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन दिए गए और धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब किसान आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। किसान संगठन ने अपनी प्रमुख मांगों में ग्राम पंचायत बरेठी स्थित राइस मिल के तीन शेड गिरने से प्रभावित गरीब मजदूरों और किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। इसके अलावा बरेठी पंचायत में कथित पंचायत टैक्स बकाया की वसूली की जांच, बेलन नदी के डीह-कोरांव मार्ग पर निर्माणाधीन पुल में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, किसानों के खेतों से निर्माण कार्य के लिए ली गई मिट्टी का भुगतान तथा अधिग्रहित भूमि का नियमानुसार मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है।
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संगठन ने यह भी मांग की है कि अधिग्रहण से अधिक भूमि पर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा पावर ग्रिड परियोजना से प्रभावित किसानों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मुआवजा नीति लागू की जाए। किसानों का कहना है कि परियोजनाओं के नाम पर उनकी भूमि का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन उन्हें नियमानुसार मुआवजा और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ज्ञापन में किसानों ने कृषि से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया है। संगठन ने मांग की है कि जिन किसानों की किसान आईडी अभी तक नहीं बन सकी है या जो समिति का ऋण जमा नहीं कर पाने के कारण खाद लेने से वंचित हैं, उन्हें भी वेयरहाउस के माध्यम से खाद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सभी पात्र किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराते हुए वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाया जाए, ताकि खेती का कार्य प्रभावित न हो।
किसान संगठन ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 जुलाई 2026 से पहले उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एसडीएम कार्यालय का घेराव किया जाएगा, धरना-प्रदर्शन होगा और कार्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी। संगठन का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा, लेकिन यदि इस दौरान किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से आंदोलन की चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब किसानों और प्रशासन की नजर 7 जुलाई पर टिकी हुई है कि उससे पहले मांगों के समाधान के लिए कोई पहल होती है या आंदोलन तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
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