
सागर/मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट: डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देशन में संचालित “सेफ क्लिक 2.0” अभियान के तहत सागर जिले में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान के 13वें दिन “साइबर पोर्टल जागरूकता” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकों को ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर ठगी से बचाव और विभिन्न सरकारी पोर्टलों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के मार्गदर्शन में यह अभियान जिले के सभी थाना क्षेत्रों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, बैंकों, बाजारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों ने हजारों नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के प्रति जागरूक किया और साइबर अपराध से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए। कार्यक्रम में नागरिकों को केंद्रीय संचार मंत्रालय के संचार साथी और सीईआईआर पोर्टल की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल फोन चोरी हो जाए या गुम हो जाए तो वह CEIR पोर्टल के माध्यम से अपने मोबाइल के IMEI नंबर को ब्लॉक करा सकता है। इससे चोरी हुआ मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग नहीं किया जा सकेगा। मोबाइल मिलने पर उसी पोर्टल के माध्यम से उसे दोबारा अनब्लॉक भी कराया जा सकता है।
अभियान के दौरान ‘चक्षु’ सुविधा की भी जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को फर्जी केवाईसी अपडेट, बैंक अधिकारी बनकर कॉल, नौकरी, लॉटरी, निवेश या अन्य किसी प्रकार की संदिग्ध कॉल, एसएमएस अथवा व्हाट्सएप संदेश प्राप्त होता है तो उसकी शिकायत चक्षु प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा केवाईएम सेवा के बारे में भी लोगों को जागरूक किया गया। पुलिस ने सलाह दी कि सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले उसका IMEI नंबर जांच लेना चाहिए, ताकि चोरी या आपराधिक गतिविधियों में प्रयुक्त मोबाइल खरीदने से बचा जा सके।
सागर पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन 1930 के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, यूपीआई धोखाधड़ी, सोशल मीडिया अपराध, फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों की स्थिति में पीड़ित को बिना देरी किए तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध के शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते शिकायत दर्ज हो जाए तो ठगी गई राशि को संबंधित बैंक खाते में फ्रीज या होल्ड कर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी कि शिकायत दर्ज कराते समय बैंक ट्रांजेक्शन आईडी, यूपीआई आईडी, संबंधित मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी, स्क्रीनशॉट, चैट और कॉल रिकॉर्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज अपने पास रखें, ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। अभियान के दौरान बैंक खाते फ्रीज होने से संबंधित भ्रांतियों को भी दूर किया गया। पुलिस ने बताया कि यदि किसी साइबर शिकायत के कारण किसी व्यक्ति का बैंक खाता फ्रीज हो जाता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। संबंधित व्यक्ति अपनी बैंक शाखा में लिखित आवेदन देकर खाता फ्रीज होने का कारण, शिकायत संख्या और जांच एजेंसी की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसके बाद वैध केवाईसी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत कर बैंक की शिकायत निवारण प्रणाली (GRM) के माध्यम से खाते को अनफ्रीज कराने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
अभियान के समापन पर सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, सीवीवी नंबर, नेट बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान का उद्देश्य केवल साइबर अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को पहले से जागरूक कर डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखना है। आने वाले दिनों में भी जिलेभर में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।
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