लखनऊ में मायावती का बड़ा बयान: ‘चुनावी स्वार्थ के लिए हिंसा और सड़क जाम नहीं करती बसपा’, विरोधियों पर दलितों को बांटने और गुमराह करने का लगाया आरोप

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को अपनी पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली को स्पष्ट करते हुए विरोधियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बसपा चुनावी स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए सड़क जाम करने, धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़, हिंसा फैलाने या भ्रामक प्रचार करने जैसी राजनीति पर बिल्कुल भरोसा नहीं करती। मायावती के अनुसार, उनकी पार्टी हमेशा भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तय दायरे में रहकर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी का हित, सभी का सुख) की नीति पर प्रतिबद्धता के साथ काम करती है।

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी अपने एक विस्तृत बयान में बिना किसी राजनीतिक दल या संगठन का नाम लिए परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और उनके संरक्षण में फल-फूल रहे विभिन्न संगठन इन दिनों दलितों और बहुजन समाज को उग्र आंदोलनों व भावनात्मक नारों के जाल में फंसाकर गुमराह करने की साजिश रच रहे हैं। मायावती ने कहा कि ऐसे लोग और संगठन दलितों के हितों की रक्षा करने के नाम पर केवल अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं, जबकि बसपा का इतिहास गवाह है कि उसने हमेशा सत्ता के माध्यम से ही वास्तविक सामाजिक परिवर्तन लाने और शोषितों के आर्थिक उत्थान का ठोस रास्ता अपनाया है।

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अपने बयान में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सूबे में बसपा की चार अलग-अलग कार्यकालों की सरकारों के दौरान जनकल्याण, सख्त कानून-व्यवस्था और समग्र विकास के क्षेत्र में पूरे देश के सामने एक आदर्श शासन (गुड गवर्नेंस) का उदाहरण पेश किया गया था। उनके मुताबिक, बसपा ने कभी भी शोषितों की समस्याओं पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने या किसी भी प्रकार की अवसरवादी राजनीति करने के बजाय गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (सवर्णों) के वास्तविक हितों को हर स्तर पर प्राथमिकता दी है।

मायावती ने संगठनात्मक मोर्चे पर बात करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बसपा का जनाधार लगातार बढ़ता देख विरोधी खेमे में भारी बेचैनी और छटपटाहट है। इसी राजनीतिक घबराहट की वजह से वे विभिन्न नए दलित संगठनों और छद्म राजनीतिक समूहों को मोहरे की तरह आगे कर रहे हैं ताकि बहुजन समाज के वोटों को आपस में बांटा जा सके और जनता के बीच भ्रम फैलाया जा सके। उन्होंने अपने कोर वोटर और बहुजन समाज से अपील की कि वे विरोधियों के ऐसे तमाम विभाजनकारी प्रयासों के प्रति पूरी तरह सतर्क और सावधान रहें।

युवाओं के भविष्य की चिंता जताते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा कभी नहीं चाहती कि देश और प्रदेश के बेरोजगार युवा या समाज के वंचित वर्ग अपनी जायज समस्याओं को लेकर उग्र आंदोलनों के रास्ते पर चलें और बाद में उन पर दर्ज होने वाले मुकदमों, जेल जाने या अन्य कठोर सरकारी कार्यवाहियों का शिकार बनें। उन्होंने सचेत किया कि ऐसे हिंसक या उग्र प्रदर्शनों का सबसे ज्यादा खामियाजा स्वयं इन युवाओं के भविष्य और उनके गरीब परिवारों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने इसे युवाओं के करियर को बर्बाद करने की विरोधियों की एक सोची-समझी और गहरी रणनीतिक साजिश करार दिया।

अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुए पूर्ववर्ती हिंसा प्रकरण का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब सहारनपुर में दलितों पर अत्याचार हुआ था, तब बसपा ने सड़क से लेकर देश की संसद तक पीड़ित दलितों की आवाज को पूरी ताकत के साथ बुलंद किया था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब संसद के भीतर उनकी बात को संतोषजनक ढंग से नहीं सुना गया और सुनवाई में अड़ंगा लगाया गया, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए राज्यसभा की माननीय सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंपकर देश के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनके अनुसार, बसपा का इतिहास यह साबित करता है कि उसका संघर्ष हमेशा संवैधानिक और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर ही रहा है।

संबोधन के अंत में मायावती ने पार्टी के वैचारिक आधार को याद करते हुए कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना इसी उद्देश्य से की थी कि बहुजन समाज को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाकर सामाजिक न्याय का परम लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने अंत में दोहराया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के दिखाए मार्ग और उनके ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ के मूल विचार को आगे बढ़ाना ही बसपा का एकमात्र मिशन है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस पवित्र अभियान के रास्ते में जो भी तत्व या संगठन बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं, वे असल में बहुजन आंदोलन को भीतर से कमजोर करने का घिनौना प्रयास कर रहे हैं।

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    Rashel Kachwah Rajput

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