एमपी शिक्षा विभाग में दोहरा मापदंड? तीन संतान वाले शिक्षक की नियुक्ति रद्द, चार संतान वाले शिक्षक पर कार्रवाई अब तक लंबित

मैहर/भोपाल/ब्रांणवाणी की खास रिपोर्ट: मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग में सेवा नियमों के समान अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश में गलत जानकारी देकर शासकीय सेवा प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है, लेकिन अलग-अलग जिलों में एक जैसे मामलों में अलग-अलग स्तर की कार्रवाई होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। एक ओर भोपाल संभाग के विदिशा जिले में तीन संतान वाले माध्यमिक शिक्षक की नियुक्ति नियमों के आधार पर निरस्त कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर सतना जिले के रामनगर विकासखंड में पदस्थ चार संतान वाले शिक्षक के मामले में उपखंड मजिस्ट्रेट की अनुशंसा के बावजूद अब तक अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी है।

सतना जिले के रामनगर विकासखंड में पदस्थ शिक्षक शिवकुमार लाल चतुर्वेदी के खिलाफ शिकायत प्राप्त होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई थी। जांच के दौरान यह दावा किया गया कि शिक्षक की चार संतान हैं, जबकि मध्यप्रदेश शासन के सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित तिथि के बाद तीसरी संतान होने की स्थिति में शासकीय सेवा के लिए अयोग्यता लागू होती है। जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन उपखंड मजिस्ट्रेट, रामनगर ने दिसंबर 2022 में शिक्षक की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए पूरा प्रकरण कलेक्टर सतना, जिला पंचायत तथा जिला शिक्षा अधिकारी को भेज दिया था। इसके बावजूद करीब साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इस मामले में अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि मामला अब भी विभागीय स्तर पर लंबित है।

इसके विपरीत विदिशा जिले में सामने आए एक मामले में माध्यमिक शिक्षक द्वारा नियुक्ति के समय तीन संतान होने की जानकारी छिपाने का मामला सामने आने पर संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण भोपाल ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियमों का हवाला देते हुए संबंधित शिक्षक की नियुक्ति निरस्त कर दी। विभाग ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति के समय गलत जानकारी देना और सेवा नियमों का उल्लंघन नियुक्ति निरस्त किए जाने का पर्याप्त आधार है।

दोनों मामलों की तुलना के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेवा नियम पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू हैं तो एक जिले में त्वरित कार्रवाई और दूसरे जिले में वर्षों तक लंबित रहने की स्थिति प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े करती है। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि सतना मामले में जांच पूरी हो चुकी है और उपखंड मजिस्ट्रेट द्वारा सेवा समाप्ति की अनुशंसा भी की जा चुकी है, तो अब तक अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया।

मामले को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या विभाग सभी जिलों में एक समान मापदंड अपनाएगा या फिर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग प्रक्रिया जारी रहेगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सतना जिले के लंबित प्रकरण में संबंधित अधिकारियों द्वारा कब अंतिम निर्णय लिया जाता है और क्या विदिशा की तरह वहां भी सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी या मामला आगे भी फाइलों में लंबित रहेगा।

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    Rashel Kachwah Rajput

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