
सीहोर/ नफीस ख़ान: भैरूंदा तहसील का सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। कागजों में 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में फिलहाल केवल 55 बेड ही संचालित हो रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने पर कई बार एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज करना पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल में जनरल वार्ड में करीब 30, प्रसूति वार्ड में 15 और एनआरसी वार्ड में लगभग 10 बेड उपलब्ध हैं। हालांकि अस्पताल का ढांचा 100 बेड के अनुरूप तैयार है, लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के कारण पूरी क्षमता का संचालन नहीं हो पा रहा।
गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मरीजों, प्रसूति मामलों और आपात स्थिति के रोगियों को अक्सर सीहोर या भोपाल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अतिरिक्त खर्च और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सड़क हादसे में सामने आई व्यवस्थाओं की कमी
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हाल ही में भैंसान-आमिरगंज मार्ग पर हुए सड़क हादसे में 25 से अधिक घायल मजदूरों को भैरूंदा सिविल अस्पताल लाया गया था। बेड कम होने के कारण कई घायलों को एक ही बेड पर भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद गंभीर घायलों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया गया।
डॉक्टरों की कमी और निजी अस्पतालों पर निर्भरता
अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण सभी को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल की कमजोर व्यवस्था के चलते मरीज निजी क्लीनिकों का रुख करने को मजबूर हैं, जहां इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
दवाओं और जांच सुविधाओं का भी अभाव
मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सामान्य दवाएं ही उपलब्ध रहती हैं, जबकि कई जांचें बाहर निजी लैब में करानी पड़ती हैं। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी महसूस की जा रही है।
सीबीएमओ ने क्या कहा?
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भैरूंदा सीबीएमओ डॉ. मनीष सारस्वत ने बताया कि अस्पताल में 100 बेड के लिए वार्ड तैयार हैं और जल्द ही सभी बेड उपलब्ध कराए जाएंगे। फिलहाल 55 बेड संचालित हैं। उन्होंने बताया कि महिला विशेषज्ञ डॉ. रुक्मणि के स्थानांतरण के बाद अभी तक नई महिला विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हुई है। डॉक्टरों की कमी से जिला प्रशासन को अवगत करा दिया गया है और संभाग स्तर से नियुक्ति की प्रक्रिया अपेक्षित है। उन्होंने जल्द व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई।
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