
सागर।मनीष कुमार चौबे| मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय ने शनिवार को अपना 78वां स्थापना दिवस श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने संस्थापक डॉ. सर हरीसिंह गौर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के साथ शहर के गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
समाधि स्थल पर हुआ पुष्पांजलि कार्यक्रम
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर, कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय, विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने डॉ. हरीसिंह गौर की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहर के कई गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर संस्थापक के योगदान को याद किया।
78 वर्ष पहले रखी गई थी विश्वविद्यालय की नींव
आज ही के दिन 78 वर्ष पूर्व महान शिक्षाविद्, विधिवेत्ता और दानवीर डॉ. सर हरीसिंह गौर ने अपनी जीवनभर की कमाई दान कर बुंदेलखंड में इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है और देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में अपनी पहचान रखता है।
‘शिक्षा से राष्ट्र निर्माण’ का सपना आज भी प्रेरणा
कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर का सपना केवल एक विश्वविद्यालय बनाना नहीं था, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र का निर्माण करना था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिवार आज भी उसी संकल्प के साथ शिक्षा की गुणवत्ता और शोध को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है।
देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय अपनी स्थापना से ही उच्च शिक्षा, शोध और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय ने स्थापना दिवस पर संस्थापक के आदर्शों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प दोहराया।
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