
खिमलासा/सागर (मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट): मध्यप्रदेश के सागर जिले के ऐतिहासिक नगर खिमलासा में रविवार का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहा। नगर के इतिहास में पहली बार भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य महारथ यात्रा का आयोजन किया गया। इस्कॉन (ISKCON) सागर के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरा नगर भगवान जगन्नाथ की भक्ति में डूबा नजर आया। सुबह से ही खिमलासा में उत्सव जैसा माहौल रहा। हरिनाम संकीर्तन, जय जगन्नाथ के उद्घोष और भक्ति गीतों से नगर की गलियां गूंज उठीं। महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी श्रद्धालु भगवान के दर्शन और रथ यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
राजमंदिर प्रांगण से शुरू हुई भव्य यात्रा
भगवान जगन्नाथ महारथ यात्रा का शुभारंभ खिमलासा के ऐतिहासिक राजमंदिर प्रांगण से विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ किया गया। भव्य रूप से सजाए गए रथ में भगवान श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को विराजमान किया गया। जैसे ही रथ यात्रा प्रारंभ हुई, श्रद्धालुओं में भगवान के रथ की रस्सी खींचने को लेकर उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
नगरवासियों ने पुष्प वर्षा कर किया स्वागत
महारथ यात्रा राजमंदिर से निकलकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बड़े बाबा हनुमान जी सरकार मंदिर तक पहुंची। रास्तेभर स्थानीय लोगों ने रंगोली सजाकर, आरती उतारकर और पुष्प वर्षा कर भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति संगीत पर झूमते नजर आए। इस्कॉन के भक्तों द्वारा किए जा रहे हरिनाम संकीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
छप्पन भोग और महाप्रसाद का आयोजन
धार्मिक आयोजन के दौरान भगवान जगन्नाथ को विशेष रूप से छप्पन भोग अर्पित किया गया। यात्रा के समापन के बाद हनुमान जी सरकार मंदिर परिसर में भगवान की महाआरती की गई। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर वर्ष आषाढ़ मास में अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी गुंडिचा देवी के घर जाते हैं। इसी परंपरा के प्रतीक स्वरूप देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राएं निकाली जाती हैं। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं से जुड़ी नवकलेवर परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के तहत कई वर्षों के अंतराल में भगवान की लकड़ी से बनी प्रतिमाओं का परिवर्तन किया जाता है।
भक्ति और सामाजिक एकता का बना प्रतीक
खिमलासा में पहली बार आयोजित हुई यह महारथ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गई। इस्कॉन सागर संस्था और नगरवासियों के सहयोग से संपन्न हुए इस आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण को नई ऊर्जा दी। स्थानीय लोगों ने इसे नगर के इतिहास का यादगार अवसर बताते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों की निरंतरता की इच्छा व्यक्त की।
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