
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र 2026 के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए एक बेहद सकारात्मक और विकासोन्मुखी संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि संसद का यह पूरा सत्र पूरी तरह सार्थक और उत्पादक रहेगा। उन्होंने प्राकृतिक मानसून की तुलना लोकतांत्रिक व्यवस्था से करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक सक्रिय मानसून पूरे देश की खुशहाली और कृषि के लिए लाभकारी होता है, उन्होने आगे कहा की ठीक उसी प्रकार संसद का एक उत्पादक मानसून सत्र भी राष्ट्रहित और देश के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी भाव के साथ प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से संसद के सुचारू संचालन और रचनात्मक चर्चा में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की भावुक अपील की।
मानसून और विधायी कार्यक्षमता की अनूठी तुलना
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में प्रकृति और लोकतंत्र के बीच एक गहरा जुड़ाव स्थापित किया। उन्होंने कहा कि चाहे आसमान का मानसून हो या लोकतंत्र के मंदिर का मानसून सत्र, जब ये दोनों अपनी पूरी क्षमता के साथ सक्रिय होते हैं, तो इनका सीधा और बड़ा लाभ देश की अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को मिलता है। उन्होंने सभी सांसदों और देशवासियों से आह्वान किया कि हम सबकी यही सामूहिक प्रार्थना होनी चाहिए कि इस बार देश में मानसून भी भरपूर रहे और संसद का यह सत्र भी अभूतपूर्व रूप से उत्पादक साबित हो, ताकि देशहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विषयों पर समय रहते सार्थक निर्णय लिए जा सकें।
वैश्विक मंच और अंतरिक्ष में देश की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर गर्व
प्रधानमंत्री ने पिछले एक महीने के भीतर भारत द्वारा अर्जित की गई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और वैज्ञानिक सफलताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के दिनों में भारत ने अंतरिक्ष, विज्ञान और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में कई ऐसी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने दुनिया भर में हर एक भारतीय का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। उन्होंने इसके लिए विशेष रूप से भारतीय युवाओं की ऊर्जा की सराहना की और कहा कि देश में फल-फूल रही स्टार्टअप संस्कृति तथा नवाचार के दम पर आज भारत लगातार नई और अकल्पनीय ऊंचाइयों को छू रहा है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की असीमित क्षमता
वैज्ञानिक प्रगति पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नागरिक की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक सफल पहुंच और निजी क्षेत्र के अंतरिक्ष स्टार्टअप ‘स्काईरूट’ की हालिया ऐतिहासिक सफलता का गौरवगान किया। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश के युवाओं ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का परचम पूरी दुनिया में लहरा दिया है। कम उम्र के इन युवा नवप्रवर्तकों ने यह साबित कर दिया है कि भारत के युवाओं की क्षमता, मेधा और उनकी आकांक्षाएं अनंत अंतरिक्ष की तरह ही पूरी तरह असीमित हैं।
नीतिगत सुधारों से बदलती देश की तस्वीर
प्रधानमंत्री ने इन तमाम सफलताओं का श्रेय सरकार द्वारा किए गए ढांचागत सुधारों को दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केंद्र सरकार के निरंतर सुधारों और दूरदर्शी नीतिगत बदलावों का ही सीधा परिणाम है कि आज देश का युवा वर्ग बड़े से बड़ा जोखिम उठाने से नहीं डर रहा है और हर क्षेत्र में नई सफलताएं हासिल कर रहा है। सरकार द्वारा तैयार किए गए अनुकूल और सुगम वातावरण के कारण ही आज नवाचार और उद्यमिता को एक नई व अभूतपूर्व गति मिली है, जिसका दूरगामी लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
बुनियादी ढांचे और भविष्य की परियोजनाओं का रोडमैप
देश के औद्योगिक विकास का खाका खींचते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कई बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का जिक्र किया:
राजस्थान तेल रिफाइनरी: उन्होंने पश्चिमी भारत में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली नई अत्याधुनिक तेल रिफाइनरी का उल्लेख किया।
तीसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र: भारत को वैश्विक चिप निर्माण का हब बनाने की दिशा में देश के तीसरे बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट की स्थापना को एक मील का पत्थर बताया।
हरित ऊर्जा में क्रांति: उन्होंने दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ‘हरित हाइड्रोजन ट्रेन’ के ऐतिहासिक शुभारंभ का विशेष रूप से जिक्र किया।
वैश्विक संकट के बीच मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों पर भी बेबाकी से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी गहराते सैन्य संघर्ष और तनाव के कारण भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने वाले देश के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, आवश्यक उर्वरकों और रसायनों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव है। लेकिन इस विपरीत परिस्थिति में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो भारतीय बाजार की आंतरिक क्षमता, स्थिरता और देश के दृढ़ संकल्प को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से प्रदर्शित करता है।
व्यवधान छोड़ रचनात्मक बहस की पुरजोर अपील
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों से विधायी मर्यादा बनाए रखने का कड़ा आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज देश का जागरूक युवा वर्ग संसद की ओर बड़ी उम्मीदों से देख रहा है और उसकी यह स्पष्ट अपेक्षा है कि लोकतंत्र के इस सर्वोच्च सदन में हंगामे के बजाय सार्थक और बौद्धिक चर्चा हो। राष्ट्रहित के गंभीर मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सांसदों को सीख देते हुए कहा कि जिस चर्चा में ठोस तथ्य, मजबूत तर्क और देश कल्याण की भावना होती है, वहां व्यवधानों या हंगामे की कोई आवश्यकता नहीं होती। एक शांत और अनुशासित वातावरण में भी अपनी बात को बेहद प्रभावी और पुरजोर तरीके से सरकार के सामने रखा जा सकता है।
ये भी पढ़े – सीएम मोहन यादव और कैबिनेट का अनोखा अंदाज, VIP कल्चर छोड़ ई-बस से पहुंचे जगदीशपुर, UCC-2026 विधेयक को मिली मंजूरी
- pm-modi-addresses-media-before-monsoon-session-2026-appeals-for-productive-parliament











