
सागर/ मनीष कुमार चौबे: संकट की घड़ी में डायल-112 सेवा एक बार फिर आमजन के लिए भरोसे का माध्यम साबित हुई। सागर जिले में रास्ता भटककर अपने दो छोटे बच्चों के साथ परेशान हो रही एक महिला को डायल-112 की टीम ने अपनी सूझबूझ, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उसके ससुराल तक पहुंचाया।
दो बच्चों के साथ रास्ता भटक रही थी महिला
19 जुलाई 2026 की रात डायल 112 कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि शाहगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम नरवा में एक महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ भटक रही है। महिला को अपने घर का सही पता याद नहीं था, जिसके चलते वह काफी परेशान थी।
सूचना मिलते ही एफआरवी 12 में तैनात आरक्षक विशाल प्रजापति और पायलट संजय रजक तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने महिला से धैर्यपूर्वक और आत्मीयता के साथ बातचीत कर उसके संबंध में जानकारी जुटाई।
सिर्फ पानी की टंकी के पास घर होने की थी जानकारी
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महिला ने पुलिस को बताया कि वह अपने मायके बम्होरी से बस के जरिए ससुराल जाने के लिए निकली थी, लेकिन उसे ससुराल वाले गांव का नाम याद नहीं था। वह केवल इतना बता सकी कि उसका ससुराल नरवा गांव के आसपास है और घर के बाहर पानी की टंकी बनी हुई है।
सीमित जानकारी के बावजूद पुलिस टीम ने प्रयास जारी रखा। महिला और उसके दोनों बच्चों को साथ लेकर आसपास के गांवों में संभावित स्थानों की तलाश शुरू की गई।
तीन गांवों में तलाश के बाद मिली मंजिल
एफआरवी टीम ने लगातार प्रयास करते हुए तीन अलग-अलग गांवों में पानी की टंकियों के आसपास बने मकानों की पहचान कराई। आखिरकार ग्राम रिछाई पहुंचने पर महिला ने पानी की टंकी के पास बने एक मकान को पहचान लिया और बताया कि यही उसका ससुराल है।
इसके बाद पुलिस टीम ने महिला के परिजनों से संपर्क किया। आवश्यक सत्यापन के बाद महिला और उसके दोनों बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
परिजनों ने पुलिस का जताया आभार
बहू और दोनों बच्चों को सुरक्षित देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली। उन्होंने डायल-112 टीम की संवेदनशीलता, धैर्य और मानवीय व्यवहार की सराहना करते हुए पुलिस का आभार व्यक्त किया।
इस पूरे मामले में आरक्षक विशाल प्रजापति और पायलट संजय रजक की सूझबूझ और तत्परता की विशेष सराहना की जा रही है। सागर पुलिस का कहना है कि डायल-112 केवल आपातकालीन सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरत के समय आम नागरिकों का भरोसेमंद साथी भी है।
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