
देवरी/ मनीष कुमार चौबे: करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया देवरी का अत्याधुनिक शासकीय संदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 36 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से तैयार इस भवन की छत से बारिश का पानी रिसने लगा। स्कूल के क्लासरूम, स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब में पानी टपकने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोकार्पण के कुछ समय बाद ही सामने आई खामी
बताया जा रहा है कि इस भव्य स्कूल भवन का लोकार्पण कुछ समय पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था। भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस बताया गया था, लेकिन पहली बारिश में ही छत से पानी रिसने की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जब छात्र कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान छत से पानी टपकने लगा। इससे जहां पढ़ाई प्रभावित हुई, वहीं कंप्यूटर लैब में रखे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
3 हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा पर चिंता
इस विद्यालय में करीब 3 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। पहली ही बारिश में भवन की छत से पानी रिसने की घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
लोगों का कहना है कि यदि भवन पहली बारिश में ही पानी रोकने में असफल रहा है, तो आने वाले दिनों में तेज बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
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निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी जांच पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और भवन की तकनीकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का सवाल है कि भवन के लोकार्पण से पहले क्या संबंधित विभाग और तकनीकी टीम ने इसकी गुणवत्ता की जांच की थी।
यदि तकनीकी जांच की गई थी, तो इतनी बड़ी खामी सामने क्यों नहीं आई? वहीं, भवन को विद्यार्थियों के उपयोग के लिए सौंपने से पहले इसकी वॉटरप्रूफिंग और निर्माण गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई, इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया जाता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही स्कूल भवन की तत्काल मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग कराकर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
विभाग और प्राचार्य की चुप्पी पर भी सवाल
मामला सामने आने के बाद अब तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, विद्यालय के प्राचार्य ने भी मीडिया के सामने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
अब देखना होगा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस भवन में पहली बारिश में सामने आई खामी पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं।
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