
रामनगर (मैहर) |आदि मिश्रा| शैलेन्द्र चौरसिया। मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में शिक्षा गारंटी योजना (ईजीएस) के तहत हुई एक शिक्षक नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2004 में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति कराई गई और वर्षों बाद भी संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले में वेतन वसूली और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 1998 में गुरजनहा (भरतपुर) में रमेश जयसवाल पिता जगदीश जयसवाल की ईजीएस गुरुजी के रूप में नियुक्ति हुई थी। बाद में उनके संविदा शिक्षक बनने के बाद कथित रूप से उनके नाम पर जारी प्रशिक्षण आदेश का लाभ रमेश जयसवाल पिता रामचरण जयसवाल, निवासी गैलहरी, को दिला दिया गया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि प्रशिक्षण आदेश में नाम का दुरुपयोग कर नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की गई।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ईजीएस योजना के तहत स्थानीय निवासी होना अनिवार्य था, जबकि संबंधित व्यक्ति कथित रूप से उस ग्राम पंचायत का निवासी नहीं था। उन्होंने ग्राम पंचायत के प्रस्ताव, मतदाता सूची, सेवा पुस्तिका और प्रशिक्षण अभिलेखों की जांच कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वेतन वसूली और एफआईआर की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में नियुक्ति में अनियमितता या फर्जीवाड़ा सिद्ध होता है तो संबंधित व्यक्ति की सेवा समाप्त कर अब तक प्राप्त वेतन और अन्य शासकीय लाभों की वसूली की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि पूर्व में आदिवासी समाज की शिकायत के बाद हुई जांच में नियुक्ति को अवैध बताया गया था और कार्रवाई के लिए मामला उच्च अधिकारियों को भेजा गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल मामले को लेकर शिकायतें संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं। अब प्रशासन द्वारा अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने का इंतजार है।
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