सागर में मातृ शिशु मृत्यु दर शून्य करने की पहल: कलेक्टर प्रतिभा पाल ने ANM, आशा और CHO को दिया विशेष प्रशिक्षण

सागर/ मनीष कुमार चौबे: जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने और इसे शून्य तक पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और मैदानी अमले के प्रशिक्षण पर जोर बढ़ा दिया है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखंडों में एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स के लिए ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण एवं समीक्षा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जैसीनगर विकासखंड में एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नार्वे की स्वास्थ्य व्यवस्था का दिया उदाहरण

प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि नार्वे जैसे देशों ने मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के बेहतर फॉलो-अप के जरिए मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को बेहद कम स्तर तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्य भी सीमित संसाधनों के बावजूद इस दिशा में बेहतर काम कर रहे हैं।

कलेक्टर ने मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से कहा कि सही कार्यप्रणाली, समय पर पहचान और लगातार निगरानी के जरिए सागर जिला भी मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को शून्य करने की दिशा में प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

अनमोल 2.0 और यू विन पोर्टल पर सटीक डेटा एंट्री के निर्देश

प्रशिक्षण के दौरान अनमोल 2.0 ऐप और यू-विन पोर्टल पर डेटा एंट्री की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों से संबंधित जानकारी दर्ज करते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सटीक डेटा ही बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन का आधार है। यदि ऐप या पोर्टल के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो उसे तत्काल फीडबैक के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर उसका समाधान कराया जाए।

योग्य दंपत्तियों का शत प्रतिशत पंजीयन जरूरी

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कार्यक्रम में पात्र योग्य दंपत्तियों के शत प्रतिशत पंजीयन पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उनका प्रसव पूर्व जांच यानी ANC कराना सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही प्रसव के बाद नवजात शिशुओं को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

हाई रिस्क प्रेगनेंसी की होगी सटीक निगरानी

प्रशिक्षण में हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी HRP मामलों को लेकर विशेष दिशा निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने कहा कि हाई रिस्क गर्भावस्था का कोई भी मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी से बाहर नहीं रहना चाहिए।

एएनएम द्वारा हाई रिस्क गर्भवती महिला की पहचान किए जाने के बाद उसकी पूरी जानकारी सीएचओ के पास उपलब्ध रहेगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित महिला को जिला अस्पताल या बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर करने से पहले ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को समन्वय बनाकर आवश्यक सूचना दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।

प्रसव के बाद 56 दिनों तक शिशुओं का फॉलो अप

प्रशिक्षण में प्रसव के बाद की देखभाल यानी पोस्ट नेटल केयर पर भी विशेष जोर दिया गया। एसएनसीयू से डिस्चार्ज होकर घर लौटने वाले शिशुओं का 56 दिनों तक अनिवार्य फॉलो-अप करने के निर्देश दिए गए।

एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को गृह भ्रमण के दौरान नवजात शिशुओं से संबंधित जरूरी सवाल पूछने, स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने और खतरे के संकेतों की पहचान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

पुरानी गलतियों से सीखने के लिए केस स्टडी प्रस्तुत

प्रशिक्षण सत्र के दौरान पूर्व में सामने आए मामलों और स्वास्थ्य सेवाओं में हुई चूकों पर आधारित केस स्टडी भी प्रस्तुत की गईं। इनके माध्यम से मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बताया गया कि किस स्तर पर मानवीय या तकनीकी गलती हुई और भविष्य में ऐसी चूकों को कैसे रोका जा सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार निगरानी, सही डेटा और समय पर रेफरल व्यवस्था को मजबूत कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।

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इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी, एसडीएम रोहित वर्मा, सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

  • Sagar Administration Launches Special Training To Reduce Maternal And Infant Mortality
Manisha Gupta

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