
शिवपुरी/रानू परिहार की रिपोर्ट: जिले में इस वर्ष मानसून की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। जून से शुरू हुए बारिश के मौसम ने अब तक उम्मीद के अनुरूप साथ नहीं दिया है। लगातार कम वर्षा होने से खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भू-अभिलेख कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 1 अगस्त 2026 तक जिले में केवल 288.61 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1029.47 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस तरह जिले में पिछले साल की तुलना में 740.86 मिलीमीटर कम, यानी करीब 72 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
औसत वार्षिक वर्षा से भी काफी पीछे जिला
भू-अभिलेख अधीक्षक ने बताया कि शिवपुरी जिले की औसत वार्षिक वर्षा 816.3 मिलीमीटर मानी जाती है। वर्ष 2025 में जिले में 1585.86 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई थी, जो औसत से लगभग दोगुनी थी। लेकिन इस बार मानसून की सुस्ती के कारण बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है।
तहसीलवार बारिश का हाल
जिले की अधिकांश तहसीलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। अब तक करैरा में सबसे अधिक 355.40 मिमी वर्षा हुई है। इसके बाद नरवर में 353 मिमी, शिवपुरी में 346.80 मिमी, पोहरी में 334 मिमी तथा कोलारस में 315 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बैराड़ सबसे पीछे है, जहां केवल 162 मिमी बारिश हुई है। खनियाधाना में 201.50 मिमी, पिछोर में 256 मिमी तथा बदरवास में 273.80 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
खरीफ फसलों पर मंडराया संकट
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खरीफ की फसलों पर दिखाई दे रहा है। जिले में सोयाबीन, उड़द और मक्का की खेती करने वाले किसान पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में बुवाई के बाद अंकुरित हुई फसलें नमी की कमी के कारण सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। तालाब, नदी और नाले भी अभी तक पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, जिससे सिंचाई की चिंता भी बढ़ गई है।
अगले 15 दिन महत्वपूर्ण
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो जिले में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि मौसम विभाग ने अगस्त के दूसरे सप्ताह में अच्छी वर्षा की संभावना जताई है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं।
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