
छतरपुर: जिले में तीन माह से अधिक समय से लंबित अविवादित नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों को लेकर कलेक्टर मृणाल मीणा ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व प्रकरणों की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में मामले निर्धारित समय सीमा के बाद भी लंबित पाए गए। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए छतरपुर नगर, छतरपुर ग्रामीण और नौगांव तहसीलदारों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि छतरपुर नगर तहसील में 432, नौगांव तहसील में 266 और छतरपुर ग्रामीण तहसील में 98 अविवादित नामांतरण एवं बंटवारे के प्रकरण तीन माह से अधिक समय से लंबित हैं। इस तरह तीनों तहसीलों में कुल 796 प्रकरण लंबे समय से लंबित पाए गए। कलेक्टर ने अधिकारियों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए।
सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी की भी समीक्षा
बैठक में कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के तहत दर्ज प्रकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की। खराब प्रदर्शन करने वाले संबंधित सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ और तहसीलदारों के विरुद्ध भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों से जुड़े मामलों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निर्धारित समय सीमा में प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने और शासन की सेवाओं का लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।
राजस्व न्यायालयों में CCTV से होगी निगरानी
कलेक्टर मृणाल मीणा ने जिले के सभी राजस्व न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने एडीएम को राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली की सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है। सीसीटीवी निगरानी का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ लंबित प्रकरणों के निराकरण की स्थिति पर प्रभावी नजर रखना है। कलेक्टर के सख्त रुख के बाद अब लंबे समय से लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की उम्मीद बढ़ी है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज होने के संकेत हैं।
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