119वें बलिदान दिवस पर ब्रांणवाणी विशेष: जानिए कैसे महज 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस ने देश के लिए दे दिया सर्वोच्च बलिदान और बन गए युवाओं के प्रेरणास्रोत

ब्रांणवाणी स्पेशल डेस्क स्टोरी:  भारत मां के वीर सपूत और सबसे कम उम्र के महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के 119वें बलिदान दिवस पर आज पूरा राष्ट्र उन्हें नमन कर भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। वर्ष 1908 में 11 अगस्त के ही ऐतिहासिक दिन महज 18 वर्ष की आयु में ब्रिटिश हुकूमत ने इस युवा क्रांतिकारी को फांसी पर लटका दिया था। खुदीराम बोस के अद्वितीय साहस, अटूट देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को याद करने तथा भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए आज देशभर में कई श्रद्धांजलि सभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

बचपन से ही सीने में जलती थी क्रांति की मशाल

3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के हबीबपुर गांव में जन्मे खुदीराम बोस बचपन से ही आजादी के विचारों से ओतप्रोत थे। देश को ब्रिटिश औपनिवेशिक गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए वे बेहद कम उम्र में ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। किशोरावस्था में ही वे विभिन्न क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गए और ब्रिटिश शासन के खिलाफ पर्चे बांटने से लेकर सशस्त्र क्रांति की राह पर आगे बढ़ गए।

मुजफ्फरपुर बम कांड: किंग्सफोर्ड को सबक सिखाने की ऐतिहासिक योजना

वर्ष 1908 में क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहे बंगाल में ब्रिटिश मजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड अपने क्रूर और पक्षपातपूर्ण फैसलों के लिए क्रांतिकारियों के निशाने पर था। भारतीय क्रांतिकारियों पर अत्याचार करने वाले इस क्रूर जज को सजा देने की जिम्मेदारी युवा खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चाकी को सौंपी गई।

दोनों क्रांतिकारी रणनीति के तहत बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे और कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की गतिविधियों की रेकी की। 30 अप्रैल 1908 की शाम, जैसे ही मुजफ्फरपुर क्लब से किंग्सफोर्ड जैसी दिखने वाली बग्गी बाहर निकली, खुदीराम और प्रफुल्ल चाकी ने उस पर सटीक निशाना साधते हुए बम फेंक दिया। हालांकि, उस गाड़ी में किंग्सफोर्ड मौजूद नहीं था, बल्कि उसमें दो ब्रिटिश महिलाएं (कैनेडी परिवार की मां-बेटी) सवार थीं, जिनकी इस धमाके में मौत हो गई।

शहादत और फांसी के फंदे तक का सफर

घटना के बाद दोनों क्रांतिकारी वहां से निकल गए। प्रफुल्ल चाकी को जब पुलिस ने घेरा, तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथों गिरफ्तार होने के बजाय खुद को गोली मारकर अपनी मातृभूमि के लिए प्राण त्याग दिए। वहीं दूसरी ओर, खुदीराम बोस को वैनी रेलवे स्टेशन (जो अब खुदीराम बोस पूसा स्टेशन के नाम से जाना जाता है) के पास ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद चले संक्षिप्त और पक्षपातपूर्ण मुकदमे में 18 वर्षीय खुदीराम बोस को फांसी की सजा सुनाई गई। अदालत में सजा सुनते वक्त भी उनके चेहरे पर भय का एक भाव भी नहीं था, बल्कि उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।

हाथ में भगवद्गीता और होठों पर ‘वंदे मातरम’

11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारागार में जब खुदीराम बोस को फांसी के तख्ते तक ले जाया गया, तब उनके एक हाथ में पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता थी और होठों पर निडरता से ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष था। उन्होंने बिना किसी झिझक के हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। खुदीराम बोस का यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और युगांतकारी मोड़ साबित हुआ। उनके इस अमर बलिदान ने देश के लाखों युवाओं के भीतर देशभक्ति की नई ज्वाला प्रज्वलित कर दी। आज भी उनका अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम हर भारतीय के लिए प्रेरणा का एक अमर स्रोत बना हुआ है।

  • balidan-diwas-special-khudiram-bose-18-year-old-martyrdom-youth-inspiration
  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

    14+ वर्षों का अनुभव। हर दिन, पल-पल की खबरों के साथ। निष्पक्ष व भरोसेमंद रिपोर्टिंग, हर खबर की गहराई तक पहुँचने का प्रयास। सच्ची पत्रकारिता, आपके भरोसे के साथ।

    Related Posts

    हार्ट रोड सब्जी मंडी में गंदगी का कचरा बना मवेशियों के जान का संकट, अव्यवस्था पर उठे सवाल

    गुना/ मोहित सोनी : शहर के हार्ट रोड स्थित…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    119वें बलिदान दिवस पर ब्रांणवाणी विशेष: जानिए कैसे महज 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस ने देश के लिए दे दिया सर्वोच्च बलिदान और बन गए युवाओं के प्रेरणास्रोत

    119वें बलिदान दिवस पर ब्रांणवाणी विशेष: जानिए कैसे महज 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस ने देश के लिए दे दिया सर्वोच्च बलिदान और बन गए युवाओं के प्रेरणास्रोत

    झारखंड में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में NDA सांसदों का संसद परिसर में मार्च, विपक्ष पर सदन बाधित करने का आरोप

    झारखंड में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में NDA सांसदों का संसद परिसर में मार्च, विपक्ष पर सदन बाधित करने का आरोप

    मध्य प्रदेश में चार नई एयर रूट शुरू, भोपाल-रीवा-जबलपुर की कनेक्टिविटी बढ़ी

    मध्य प्रदेश में चार नई एयर रूट शुरू, भोपाल-रीवा-जबलपुर की कनेक्टिविटी बढ़ी

    सीएम मोहन यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, UCC विधेयक समेत कई मुद्दों पर चर्चा

    सीएम मोहन यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, UCC विधेयक समेत कई मुद्दों पर चर्चा

    गन्ने से Ethanol पर रोक की तैयारी – चीनी कीमतें घटाने के लिए सरकार का बड़ा कदम

    गन्ने से Ethanol पर रोक की तैयारी – चीनी कीमतें घटाने के लिए सरकार का बड़ा कदम