
नई दिल्ली: मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के व्यापारिक निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में शानदार उछाल दर्ज किया गया है। जुलाई महीने में देश का व्यापारिक निर्यात बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो जून के महीने में 40.41 अरब डॉलर था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स का रहा दबदबा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, निर्यात में आई इस मजबूती की मुख्य वजह इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद (सी-फूड) और पेट्रोलियम उत्पादों की विदेशों में बढ़ी मांग है। उन्होंने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि केवल पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 8.62 प्रतिशत बढ़कर 5.7 अरब डॉलर हो गया है।
आयात में उछाल से बढ़ा व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट)
हालांकि, निर्यात के साथ-साथ देश के आयात (इम्पोर्ट) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जुलाई में भारत का कुल आयात बढ़कर 76.22 अरब डॉलर हो गया, जो जून में 70.84 अरब डॉलर था। आयात बढ़ने का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री जहाजों की आवाजाही में आ रही बाधाएं हैं, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। इसके अलावा, लाल सागर क्षेत्र में हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ा है। आयात में इस तेज उछाल की वजह से जुलाई में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, जो जून में 30.43 अरब डॉलर था।
कच्चे तेल व पूंजीगत सामान के आयात पर सरकार का स्पष्टीकरण
संसद में इस हफ्ते सरकार ने स्पष्ट किया कि व्यापार घाटे में यह बढ़ोतरी भारत के बाहरी क्षेत्र की किसी संरचनात्मक या ढांचागत कमजोरी को नहीं दर्शाती, बल्कि यह देश के तेज आर्थिक विकास, औद्योगीकरण और निर्यात में प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी उत्पादक सामानों की मांग का नतीजा है। सरकार ने बताया कि भारत के आयात का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, भारी मशीनरी, कैपिटल गुड्स, सोना-कीमती पत्थर, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल से जुड़ा है। यह आयात घरेलू जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति देने के लिए बेहद आवश्यक है।
अप्रैल-जुलाई तिमाही का लेखा-जोखा
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल से जुलाई) के दौरान भारत का कुल निर्यात 17.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 173.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, इसी अवधि के दौरान कुल आयात भी 19.27 प्रतिशत बढ़कर 292.38 अरब डॉलर दर्ज किया गया है।
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