प्रयागराज में कर्मचारी की पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, PDA अधिकारी की रिपोर्ट पर उठे सवाल

प्रयागराज में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी की पुश्तैनी जमीन पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन पर माफिया के करीबी लोगों की ओर से कब्जा किया जा रहा है। मामले में प्रयागराज विकास प्राधिकरण के जोनल अधिकारी की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। पीड़ित पक्ष ने रिपोर्ट को गलत बताते हुए अधिकारियों से मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।

पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप

मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कर्मचारी से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जे की कोशिश की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जमीन से जुड़े दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं और इसके बावजूद कथित तौर पर दूसरे पक्ष की ओर से जमीन पर अपना दावा किया जा रहा है।

इस विवाद के बीच PDA की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच के दौरान जो रिपोर्ट तैयार की गई, उसमें वास्तविक स्थिति को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।

PDA के जोनल अधिकारी की रिपोर्ट पर सवाल

पीड़ित पक्ष की ओर से PDA के जोनल अधिकारी की रिपोर्ट को गलत बताया गया है। आरोप है कि मौके की वास्तविक स्थिति और जमीन से जुड़े तथ्यों को रिपोर्ट में सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।

मामले को लेकर अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन पर वास्तविक स्थिति क्या है और किसके पास वैध दस्तावेज हैं।

माफिया के करीबियों का भी नाम सामने आया

जमीन पर कथित कब्जे के मामले में माफिया से जुड़े करीबी लोगों का नाम सामने आने का भी आरोप है। ऐसे में विवाद और गंभीर हो गया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच से यह तय होगा कि जमीन पर किसका वैध अधिकार है और PDA की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जमीन को कथित कब्जे से बचाने की मांग की है। साथ ही PDA की ओर से तैयार रिपोर्ट की भी दोबारा समीक्षा किए जाने की मांग उठी है।

अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। यदि जांच में जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, PDA अधिकारी पर लगाए गए आरोप भी जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

 
 
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  • Manisha Gupta

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