
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: शिवपुरी में निजी ITI संस्थानों के विद्यार्थियों ने शासकीय ITI शिवपुरी में आयोजित प्रायोगिक परीक्षा की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान उन्हें फेल किए जाने का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाया गया। परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने से प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
फेल होने का डर दिखाकर दबाव बनाने का आरोप
विद्यार्थियों का कहना है कि प्रायोगिक परीक्षा के दौरान उन्हें परीक्षा परिणाम को लेकर दबाव में रखा गया। आरोप है कि फेल होने का भय दिखाए जाने के कारण कई विद्यार्थी मानसिक तनाव में रहे। छात्रों ने मांग की है कि परीक्षा के दौरान अपनाई गई पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
विद्यार्थियों के मुताबिक करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने की बात सामने आई। इसी वजह से छात्र परीक्षा के मूल्यांकन और परिणाम की निष्पक्षता की जांच की मांग कर रहे हैं।
उपकरण और रॉ मटेरियल को लेकर भी सवाल
विद्यार्थियों ने परीक्षा के दौरान उपलब्ध कराए गए उपकरणों, टूल्स और रॉ मटेरियल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों और उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई।
छात्रों ने कलेक्टर से मांग की है कि परीक्षा के दौरान उपलब्ध कराए गए सभी उपकरण, टूल्स और रॉ मटेरियल का सत्यापन कराया जाए। इसके साथ ही यह भी जांच की जाए कि विद्यार्थियों को प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।
मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच की मांग
विद्यार्थियों ने केवल परीक्षा के दौरान की व्यवस्थाओं की जांच की मांग नहीं की है, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया और घोषित परिणाम की भी जांच कराने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि प्राप्त अंकों और अंतिम परिणाम की निष्पक्षता की जांच जरूरी है।
उन्होंने मांग की है कि परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अंक दिए गए या नहीं। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जाए।
विद्यार्थियों के बयान दर्ज करने की मांग
छात्रों ने कलेक्टर से पूरे मामले में विद्यार्थियों के बयान दर्ज कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों से सीधे जानकारी लेकर वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है।
विद्यार्थियों के अनुसार, जांच के दौरान परीक्षा से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक पक्ष के आधार पर निष्कर्ष न निकले और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता सामने आ सके।
अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की मांग
विद्यार्थियों ने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग की गई है।
फिलहाल विद्यार्थियों की ओर से उठाई गई शिकायतों और आरोपों की स्वतंत्र जांच होने के बाद ही परीक्षा प्रक्रिया में वास्तविक अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। विद्यार्थियों ने कलेक्टर से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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